कांग्रेस ने जिसे नकारा था, उसने इस चुनाव में आन्ध्र प्रदेश से खत्म किया उसका वर्चस्व

New Delhi: लोकसभा चुनाव जीतने के बाद दिल्ली बीजेपी हेडक्वाटॉर में  मोदी मोदी नारों के बीच , पार्टी कार्यकताओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने मंच से दक्षिण के युवा नेता को भी जीत की बधाई दी थी, दक्षिण के इस नेता का नाम जगनमोहन रेड्डी है, जिसने आन्ध्र प्रदेश   विधानसभा और लोकसभा चुनाव में एक तरफा जीत दर्ज की है।

दक्षिण भारत के उभरते हुए नेता जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने आन्ध्र प्रदेश के 175 विधानसभा वाली सीट में 155 में जीत हासिल की  और लोकसभा में 22 सीटों को अपने झोली में डालने में कामयाब रही। पिता के मुत्यु के बाद काँग्रेस से अलग हो कर नई पार्टी बनाने वाले जगन  मोहन ने मात्र दस साल के भीतर ही यह मुकाम हासिल कर लिया और अब राज्य के मुख्यमंत्री बनने के करीब हैं।आन्ध्र प्रदेश भारत के उन चुन्नीदा राज्यों में से एक है जहां इस चुनाव में बीजेपी  एक भी सीट नहीं जीत पाई है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू जल्द ही अपना इस्तीफ़ा भी दे सकते हैं। नतीजों से पहले चंद्रबाबू नायडु देशभर में घूमकर विपक्ष के नेताओं से मुलाक़ात कर रहे थे.

जगमोहन रेड्डी

10 साल में तैयार की अपनी जमीन

2009 में पिता के मृत्यु के बाद जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री बनने का सपना देखा था पर कांग्रेस ने उनके सपने पर पानी फेर दिया, बाद में कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई और 10 साल बाद मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। जगन मोहन के सफलता का अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि आन्ध्र प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को सिर्फ़ विधानसभा ही नहीं बल्कि लोकसभा में भी उनके उम्मीदवार हवा हो गए.जगनमोहन रेड्डी ने यहां बीते तीन सालों में ज़मीन पर काफ़ी मेहनत की है जिसका असर चुनाव परिणामों में भी दिख रहा है।जगन ने पिछले 14 महीने के अंदर 3,640 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा आंध्र प्रदेश के अंदर की और लोगों के सामने टीडीपी के खिलाफ अपनी बातें रखी।

पिता से मिली विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं ‘जगन’

जगन मोहन के पिता  डॉ वाईएसआर  आंध्रप्रदेश के ऐसे राजनेता रहे  हैं, जिनके कद व सम्मान के सामने कोई और आज भी राजनेता खड़ा होता नहीं दिखता है। आज भी तेलुगु भाषी दोनों राज्यों के लोगों के लिए डॉ वाईएसआर अपने आदर्शों और अपने कार्यों के जरिए अनुकरणीय कहे जाते हैं। अब आंध्र की जनता उनके बेटे वाईएस जगन मोहन रेड्डी में उनका प्रतिबिंब देखती है।लोगों की यादों में बसे डॉ वाईएसआर ने अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जनजातियों/ अनुसूचित जनजातियों और ओबीसी समेत समाज के तमाम पिछड़े वर्गों के लिए जो किया वह आज भी बेमिसाल है।YSR ने टीडीपी के शासनकाल में सरकारी अस्पतालों और उनके द्वारा दी जा रही सुविधाओं की बदहाली देखी थी और एक चिकित्सक के रूप में महसूस किया था कि गरीबी से जूझ रही जनता को कैसे इलाज जैसी मूलभूत सुविधा का हक दिलाया जाय। तब उन्होंने बीपीएल परिवारों के लिए अरोग्यश्री स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम शुरू करवाया, जिसके माध्यम से वे 2 लाख रुपये की अधिकतम सीमा तक मुफ्त उपचार का लाभ उठा सकते थे।