नवरात्र के आठवें दिन करें देवी महागौरी की उपासना, मां की पूजा करने से मिलेगी सकारात्मक उर्जा

New Delhi : मां दुर्गा का आठवां रूप है महागौरी (Mahagauri)। नवरात्रि के इसी आठवें दिन अष्टमी पूजी (Ashtami Puja) जाती है। इस दिन लोग अपने घरों में कन्याओं को भोजन के लिए बुलाते हैं। उन्हें हलवा-पूड़ी और चना खिलाते हैं

इसके साथ ही कंजकों को खाने के बाद तोहफे और पैर छूकर विदा करते हैं। (यहां जानिए पूरी कन्या पूजन विधि)। इस बार अष्टमी 17 अक्टूबर को इस मुहूर्त पर मनाई जाएगी। इस दिन कन्या पूजन के सिर्फ एक ही नहीं बल्कि दो मुहूर्त हैं।

मां महागौरी का रूप

बैल पर सवार चार भुजाओं वाली मां का नाम है महागौरी। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू होता है। दाहिना हाथ अभय मुद्रा और बायां हाथ वर-मुद्रा में होता है। गले में सफेद पुष्पों की माला और सफेद साड़ी ही मां महागौरी का श्रृंगार है। इसके अलावा सिर पर मुकूट चारों हाथों में चूड़ियां और ऊपर के दोनों हाथों में बाजूबंद ही मां के जेवर हैं।

महागौरी की पूजा

महागौरी का पूजन करने से अनेक चमत्कारिक परिणाम होते हैं। जो लोग मां महागौरी का पूजन करते हैं उनके असंभव से लगने वाले कार्य भी सफल होने लगते हैं। विवाहित महिलाएं अगर मां गौरी को चुनरी अर्पित करती हैं तो उनके सुहाग की रक्षा होती है। मां बिगड़े हुए कार्यों को बना देती हैं और उनकी उपासना से फल जल्दी प्राप्त होता है। मां गौरी का पूजन करने से तकलीफ दूर होती है, अक्षय, सुख और समृधि प्राप्त होती है।

मां गौरी के सामने घी का दीपक जलाएं और उनके स्वरूप का ध्यान करें। माता को रोली, अक्षय पुष्प अर्पित करें। मां की आरती का गुणगान करें और कम से कम 8 कन्याओं को भोजन करवाएं। इस सब से मां महागौरी प्रसन्न होंगी। जो महिलाएं शादी-शुदा हैं, उनके लिए ये दिन बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन उन्हें विशेष रूप से मां का पूजन करना चाहिए।

अष्टमी के व्रत की विधि

दुर्गा अष्टमी के दिन कई लोग अपना व्रत पूर्ण करते हैं और अंत में छोटी कन्याओं का पूजन किया जाता है और उन्हें घर बुलाकर उन्हें भोजन करवाकर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छोटी कन्याओं को देवी का रूप माना गया है। कन्याओं के पूजन के बाद ही नौ दिन के बाद व्रत खोला जाता है। व्रत को पूर्ण करने और मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने के लिए कन्याओं का अष्टमी और नवमी के दिन पूजन करना आवश्यक होता है।

आराधना मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमस्तस्यै मनो नम:।