नवरात्र के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, इनकी उपासना करने से प्राणी रहता है भय मुक्त

New Delhi : नवरात्रि (Navratri) के पर्व का काफी महत्व होता है। साल में दो बार इस पर्व को मनाया जाता है। साल 2019 में शारदीय (आश्विन) नवरात्र व्रत 29 सितंबर से शुरू होकर 8 अक्टूबर तक रहेंगे।

नवरात्र में सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। इस बार 5 अक्टूबर को नवरात्र का सातवां दिन है।

कहा जाता है, इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में कालों का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही है। कहते हैं इनकी पूजा करने से सभी दु:ख, तकलीफ दूर हो जाती है। दुश्मनों का नाश करती है और मनोवांछित फल देती हैं।

कालरात्रि की पूजा विधि

पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा लिखा हुआ है उसके अनुसार पहले कलश की पूजा करनी चाहिए। फिर नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। देवी की पूजा से पहले उनका ध्यान करना चाहिए। दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं।

इस दिन मां की आंखें खुलती हैं। षष्ठी पूजा के दिन जिस विल्व को आमंत्रित किया जाता है उसे आज तोड़कर लाया जाता है और उससे मां की आंखें बनती हैं। दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व बताया गया है। इस दिन से भक्त जनों के लिए देवी मां का दरवाजा खुल जाता है और भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन हेतु पूजा स्थल पर जुटने लगते हैं।

मां कालरात्री की पूजा करने वालों को इस मंत्र का जप करना चाहिए

‘एकवेणी जपाकर्ण, पूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी, तैलाभ्यक्तशरीरिणी वामपादोल्लसल्लोह, लताकंटकभूषणा वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा, कालरात्रिभयंकरी’