डाकिया डाक लाया, चिट्ठी आई है आई है से चिट्ठी ना कोई संदेश तक – विश्व डाक दिवस

New Delhi : वो भी क्या दिन थे जब चिट्ठियां लिखीं जाती थी। कभी नीली स्याही से, कभी काली तो कभी लाल। लाल से कागज को रंग दिया तो माशूक का दिल पिघलना एकदम कंफर्म। फिल्मों में गाने भी ऐसे ही बना करते थे, संदेशे आते हैं, कबूतर जा जा जा,लिखे जो खत तुझे और फूल तुम्हें भेजा है खत में और ना जाने क्या क्या। ये उस दौर के गाने हैं जब चिट्ठियां लिखना और भेजना एक अलग तरह की अमीरी को दर्शाता था। ये अमीरी थी शब्दों की और दोस्तों की। आज विश्व डाक दिवस पर जानेंगे कि क्यों डाक सेवाएं भारत में आज भी जिंदा है कैसे समय के साथ डाक सेवाओं ने खुद को बदला है।

ये डाक सेवाएं देंगी और लाभ।
ये डाक सेवाएं देंगी और लाभ।

9 अक्टूबर को पूरे विश्व में डाक दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद है लोगों को विश्व के सबसे बड़े डाक जाल के बारे में जागरुक करना। 1874 में इसी दिन यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का गठन किया गया था। स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में 22 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 1 जुलाई 1876 को भारत एशिया का पहला ऐसा देश था जो इस यूनियन का हिस्सा बना था। भारत हमेशा जनसंख्या और मेल ट्रैफिक की वजह से इस यूनियन का उच्च श्रेणी का मेंबर रहा है।

ट्विटर पर विजय दशमी की बधाई देते ही विजय माल्या की लग गई लंका, लोगों ने कहा ‘लोन दिला दे भाई’

अब डाक सेवाओं का काम करने का तरीका भी बदल गया है। डाक पार्सल और आधुनिक वित्तीय सेवाएं भी देने लगा है। अब लोग ऑनलाइन सेवाओं का भी लाभ उठा रहे हैं। भविष्य में पोस्टल ई सेवाएं और बढ़ा दी जाएंगी। आपको बता दें कि एक डाक कर्मचारी 1,258 औसत आबादी को सेवा मुहैया कराता है। इस समय देश में 55 प्रकार की पोस्टल ई सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। डाक ने 77 फीसदी सेवाएं ऑनलाइन दे रखीं हैं। 133 पोस्ट वित्तीय सेवाएं देंगे।