मजदूरों, स्टूडेंट्स, टूरिस्ट, तीर्थयात्री को घर जाने की अनुमति, किसी भी राज्य से कहीं भी जा सकेंगे रोड से

New Delhi : केंद्र की PM Narendra Modi की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। देश के अलग अलग राज्यों में फंसे मजदूरों, कामगारों, स्टूडेंट‍्स, टूरिस्ट और तीर्थयात्री अब चाहे देश के किसी भी कोने में फंसे हो वापस अपने घर जा सकते हैं। सरकार ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर से उठ रहे लगातार सवालों के बाद यह फैसला लिया है। खासकर इन तीनों राज्य पर काफी दबाव बन गया था उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के बोल्ड फैसलों की वजह से। योगी सरकार कोटा से 10000 छात्रों को बस से ले आई और अब मजदूरों को भी लाना शुरू कर दिया था। बिहार के मुख्यमंत्री पर जब पब्लिक दबाव बढ़ा तो उन्होंने कहा कि यह लॉकडाउन का उल्लंघन है। फिर प्रधानमंत्री के साथ सोमवार की मीटिंग में यह मसला बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर उठाया गया।

मजदूरों का पलायन व्यापक पैमाने पर हुआ लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही। सभी अपनी गांव घर गये।

बहरहाल केंद्र सरकार ने राज्यों/केन्द्र शासित राज्यों के क्षेत्रों में फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए अंतरराज्यीय यात्रा की सुविधा के लिए आदेश जारी किया है। केन्द्र सरकार के इस नए आदेश के अनुसार, सभी व्यक्तियों को चिकित्सकीय रूप से जांचा जाए और घर पहुंचाने से पहले उन्हें क्वरंटाइन किया जाए।

सरकार की तरफ से ये गाइडलाइंस ऐसे वक्त पर आई है जब दूसरी बार बढ़ाए गए लॉकडाउन की अवधि 3 मई को खत्म होने जा रही है लेकिन देश के कई हिस्सों से अभी भी कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं। इससे पहले, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केन्द्र सरकार से यह मांग की थी कि जो प्रवासी मजदूर वहां पर फंसे हुए हैं उनके लिए केन्द्र सरकार उनके घर जाने की व्यवस्था करे और ट्रेन की सुवधा दे।

सभी राज्य और केन्द्र शासित राज्य नोडल अधिकारी की नियुक्ति करे जो सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें। इतना ही नहीं राज्यों और केन्द्र शासित राज्यों में पहुंचने वाले लोगों का ब्यौरा भी रखा जाए। अगर फंसे हुए समूह में लोग एक राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश से दूसरे राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश जाना चाहते हैं तो भेजने वाले और जिस राज्य में जा वह समूह जा रहा है दोनों राज्य एक दूसरे की आपसी सहमति के साथ सड़क के जरिए भेज सकते हैं। किसी भी व्यक्ति को भेजने से पहले उसकी स्क्रीनिंग की जाए और अगर वह पूरी तरह ठीक पाया जाए तो ही उसे भेजने की मंजूरी दी जाए।

CM योगी आदित्यनाथ की पहल पर कोटा से उत्तर प्रदेश के छात्र विशेष बसों की मदद से लाये गये

प्रवासी मजदूरों, यात्रियों और छात्रों को समूह में सिर्फ बस से ही भेजा जाए। भेजने से पहले बस सेनेटाइजेशन कराया जाए। इतना ही नहीं यात्रा के समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए। रास्ते में पड़ने वाले राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश उस राज्य के लिए रास्त देंगे जहां पर ये गाड़ी जा रही है। जब कोई शख्स अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की यह जिम्मेदारी है कि उसे होम क्वारंटाइन में रखे। इस दौरान उसके हेल्थ चेकअप किए जाए। उस व्यक्ति को अरोग्य सेतु एप का इस्तेमाल करने के उत्साहित किया जाए ताकि उसके हेल्थ स्टेटस पर नजर बनाई रखे जा सके और साथ ही उसे ट्रैक किया जा सके।

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