जुर्माने से बचने के लिए महाराष्ट्र में मजदूर महिलाएं गर्भाशय निकलवाने को मजबूर, कांग्रेस ने भाजपा पर बोला हमला

New Delhi: महाराष्ट्र का मराठवाड़ा अक्सर सूखे की मार झेलता है। लेकिन इस बार मराठवाड़ा किसी और भी वजह से चर्चा में बना हुआ है। महाराष्ट्र के बीड जिले में 4605 महिलाओं के गर्भाशय निकालने का मामला सामने आया है। मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा में राज्य के स्वास्थमंत्री एकनाथ शिंदे ने यह जानकारी दी। स्वास्थ मंत्री ने अपने बयान में बताया कि पिछले तीन साल में 4605 महिलाओं के गर्भाशय निकाले गये। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा की निंदा की है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने एक ट्वीट कर लिखा है कि – ‘4605 महिलाओं को गर्भाशय निकलवाने को मजबूर करना मानवता को करती शर्मसार, 3 वर्षों तक कुंभकर्णी निंद्रा में सोती रही भाजपा की महाराष्ट्र सरकार ! केंद्र व महाराष्ट्र की सरकारें इस निन्दनीय कृत्य के दोषियों पर अविलंब कार्रवाई कर बीड जिले की पीड़ित महिलाओं के साथ इंसाफ़ करें’।

इनमें ज्यादातर महिलायें सपरिवार काम करने वाली हैं। सूखे के चलते ज्यादातर ग्रामीण आबादी अक्टूबर से मार्च तक पश्चिम महाराष्ट्र के चीनी पट्टी के खेतों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। ठेकेदार दम्पति को तरजीह देता है। एक दिन भी छुट्टी होने पर 500 रुपया जुर्माना ले लेता हैं। इसी से बचने के लिए महिलायें अपना गर्भाशय निकलवा देती हैं।

इस मामले की जाँच के लिए राज्य के मुख्य सचिव अजय मेहता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है जिसे मामलों की जाँच रिपोर्ट दो महीने में सौंपनी होगी।

मुख्य रूप से यह मुद्दा शिवसेना विधायक नीलम गोर्हे ने विधान परिषद में उठाया था, उन्होंने कहा कि बीड जिले में गन्ने के खेत में काम करने वाली महिलाओं के गर्भाशय निकाले गए। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि माहवारी के चलते उनके काम में ढिलाई न आए। मामला सामने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने राज्य सचिव को नोटिस जारी किया था। बीड जिले की सिविल सर्जन की अध्यक्षता में गठित समिति ने जाँच में पाया कि ऐसे ऑपरेशन 2016-17 से 2018-19 के बीच 99 निजी अस्पतालों में किए गए। राज्य के स्वास्थ मंत्री शिंदे ने बताया जिले में सामान्य प्रसवों की संख्या सिजेरियन की संख्या से कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं के गर्भाशय निकाले गए, उनमें अधिकतर महिलायें गन्ना खेतों में काम करने वाली मजदूर है।  मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित जाँच समिति में 3 गाइनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) और कुछ महिला विधायक होंगी। समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। इसी के साथ राज्य सरकार ने सभी डॉक्टरों को आदेश दिया है कि अनावश्यक रूप से डॉक्टर गर्भाशय न निकालें।