क्या अब वैध हो जाएगा गांजा? दिल्ली हाइकोर्ट करेगा सुनवाई

New Delhi: दिल्ली हाइकोर्ट ने गांजे को वैध बनाने की एक याचिका की जांच की सुनवाई को अपनी हामी दे दी है। जस्टिस जी एस सीस्तानी और ज्योति सिंह ने गुरुवार को वर्तमान में कानून में गांजे की स्थिति की जानकारी मांगी। जो याचिका भांग को वैध बनाने के लिए दी गई है उसमें ये कहा गया कि कठोर नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS)  के तहत इसे दूसरे रसायनों के साथ इसे गलत तरीके से जोड़ा गया है और ये पूरी तरह से मनमाना, अवैज्ञानिक और अतार्किक है।

इस महीने के बाद इस याचिका पर सुनवाई का समय तय करते हुए बेंच ने नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग पर अपनी चिंता जाहिर की और इस बात का संकेत दिया कि वो इस मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले सभी हितधारकों की बात सुनेगा। कोर्ट ने इस याचिक पर अब तक पीटिशन जारी नहीं की है जिसकी मांग Great Legislation India Movement Trust की तरफ से वरिष्ठ वकील अरविंद दत्तर और वकील जे साई दीपक ने की थी।

केंद्र सरकार ने 1985 में एनडीपीएस एक्ट 1985 में लागू करते हुए इसे बैन कर दिया था, याचिका में इस बात का दावा किया गया कि भांग की औद्योगिक खेती पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं था और किसानों को इससे बहुत फायदा हो सकता था। इस मुद्दे के चारों ओर बहस की कमी पर जोर देते हुए इस याचिका में कहा गया कि 1985 में भी सरकार ने भांग को बिना इसके फायदों और इतिहास को जाने बिना इस पर प्रतिबंध लगा दिया।

अदालत से हस्तक्षेप के लिए आग्रह करते हुए याचिकाकर्त्ता ने इस बात पर जोर दिया कि औद्योगिक गांजा एक कृषि की वस्तु है जिसकी खेती बहुत सी वस्तुओं के उत्पादन के लिए की जाती है जैस कि फाइबर बोर्ड और फर्नीचर, फूड, पेय पदार्थ, कास्मेटिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट।