पुरी रथ यात्रा क्यों होती है खास जानिए

NEW DELHI : ओडिशा की पुरी से LORD JAGANNATH की रथ यात्रा की शुरुआत इस वर्ष 4 जुलाई से हो रही है । देश-विदेश से आए लाखों पर्यटक इसमें शिरकत करेंगे । यह ओड़िशा राज्य का प्रमुख हिन्दु पर्व है जो LORD JAGANNATH को समर्पित है। इस पर्व के प्राचीन साक्ष्य ब्रह्म पुराण,पद्मा पुराण,स्कन्द पुराण और कपिला संहिता में मिलती है। वर्ष में एक बार मनाये जाने वाले इस पर्व में LORD JAGANNATH  रथ पर सवार होकर पुरी के नजदीक गुंडिचा मंदिर में जाकर ठहरते हैं  । ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर उनकी मौसी का घर है ,इस रथ यात्रा में LORD JAGANNATH के साथ-साथ उनके बड़े भाई बालभद्र और छोटी बहन सुभद्रा भी जुलूस में शामिल होती हैं । ये लोग 9 दिनों तक मंदिर के पास रुकते  हैं ।आइए जानते हैं पुरी रथ यात्रा की कुछ खास बातें –

1.LORD JAGANNATH की रथ यात्रा की शुरुआत सोने के हत्थे लगे झाड़ू को लगाकर JAGANNATH TEMPLE के सामने से की जाती है ।उसके बाद पारम्परिक वाद्य यंत्र बजते हैं और सैंकड़ों लोग तीन विशाल रथों को खींचते है ं। इस क्रम में सबसे पहले बड़े भाई बालभद्र का रथ,उसके पीछे बहन सुभद्रा का रथ और  सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ खींचा जाता है।

2.मान्यता है कि रथ खींचने में जितने लोग भाग लेते हैं उनके सभी दु:ख समाप्त हो जाते हैं और उनके जीवन में खुशियों की बौछार हो जाती है। ये तीनों रथ पुरी नगर का भ्रमण करते हुए शाम को गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं और अगली सुबह तीनों रथ से उतरकर मंदिर में प्रवेश करते हैं और 9 दिन वहीं रहते हैं । इस दौरान भगवान की खूब सेवा सत्कार होती है उन्हें उनके मन-पसंद के पकवान दिए जाते हैं ।

3. इस दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन को आड़प-दर्शन के नाम से जाना जाता है । इस दौरान भगवान के भक्तों को प्रसाद के रुप में नारियल,लाई,गंजामूं और मालपुए मिलते हैं, जिसे महाप्रसाद कहा जाता है । बिहार और पूर्वांचल में जिस प्रकार छठ और बंगाल में दुर्गा पूजा का महत्व है, ठीक उसी प्रकार ओडिशा में पुरी की रथ यात्रा का महत्व है ।

4. पुरी की रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के दसों अवतारों की पूजा की जाती है । पुरी रथ यात्रा जैसी यात्रा गुजरात की द्वारिक पुरी से भी निकलती है ।

5 . 9 दिन भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर रुकने के बाद अपने घर यानि पुरी के जगन्नाथ मंदिर वापस चले जाते हैं ।