कृष्ण ने सुदामा के पाँव आंसुओं से क्यों धोए?

New Delhi: मित्र हो तो सुदामा और कृष्ण जैसा। जब भी बात दोस्ती की होती है तो लोगों के जुबान पर यूँही सुदामा और कृष्ण की दोस्ती याद आ जाती है। सुदामा की आर्थिक हालत एकदम तंग हो गई है। लेकिन स्वाभिमानी सुदामा राजा मित्र कृष्ण से कुछ भी नहीं मांगते। एक दिन पत्नी के लाख बार कहने पर सुदामा नंगे पाँव बिना चले जा रहे हैं।

सुदामा की हालत देख द्वारका राज के द्वारपालों ने उन्हें गेट पर ही रोक लिया। सुदामा ने कांपते आवाज में कहा, ‘अरे भाई मैं तुम्हारे राजा का दोस्त हूं, सुदामा उन्हें खबर कर दो। पहले तो द्वारपालों को यकीन नहीं हुआ लेकिन बार-बार खुद को दोस्त बताने पर द्वारपालों ने कृष्ण को खबर किया’। द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम, बतावत आपन नाम सुदामा, सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने पहुंच गए।

जब कोई मेहमान थके घर आता था, तो हम गुनगुने पानी में नमक डालकर उसके पाँव धोते थे ताकि उसका थकान दूर हो जाए। सुदामा भी नंगे पाँव थके-हारे मीलों पैदल चलकर आए थे। आंसू में खारापन होता है और हल्का गुनगुना भी। मित्र के थकान को दूर करने में कहीं देर न हो जाए इसलिए स्वयं भगवान अपने मित्र के लिए इतना रो रहे हैं कि आंसुओं से ही सुदामा के पाँव धुल रहे हैं।

सुदामा भगवान श्री कृष्ण के यहां पर जाते हैं और भगवान श्री कृष्ण भी खूब सत्कार सुदामा का करते हैं लेकिन सुदामा अपने स्वाभिमान के कारण भगवान श्री कृष्ण से किसी भी तरीके की मदद नहीं ले पाते हैं लेकिन भगवान श्री कृष्ण जानते हैं उनके यहां क्यों आए हैं? जब सुदामा वापस लौट कर अपने गांव जाता है तो वह देखता है कि उसकी टूटी फूटी झोपड़ी अब एक अच्छे मकान में बदल चुकी है और बच्चे और पत्नी ने अच्छे कपड़े पहन रखे हैं भगवान श्री कृष्ण सुदामा की गरीबी मिटा देते हैं।