बिहार: ‘नेशनल तैराक टी-स्टॉल’, नेशनल लेवल के स्वीमर को जब नहीं मिलि नौकरी तो खोला टी-स्टॉल

New Delhi: बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर नेशनल लेवल का तैराक चाय बेचता है। तैराकी में कई राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पदक जीत चुके तैराक गोपाल प्रसाद यादव ने अपनी चाय की दूकान का नाम ‘नेशनल तैराक टी-स्टॉल’ रखा है। वो नौकरी न मिलने पर यहां चाय बेचकर जीवन यापन करते हैं।

काजीपुर, नयाटोला में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाने वाले गोपाल अभी भी बिहार में खेल और खिलाड़ियों की स्थिति का हाल बताने वाले एक जिंदा उदाहरण के रूप में सामने आए हैं। कभी अंतरराष्ट्रीय तैराक बनने का सपना देखने वाले गोपाल अब अपनी खराब वित्तीय स्थिति के कारण और अपने परिवार की देखभाल करने के लिए चाय बेचते हैं।

उनकी दुकान का नाम राष्ट्रीय तैराक चाय स्टाल है। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने अपनी इस दुकान का नाम इस तरह का क्यों रखा है, तो इस पर गोपाल ने कहा कि यह सभी एथलीटों की इस देश में क्या हालत है इस स्थिति को बयां करता है। ये लोगों को ये बताएगा कि आपके देश में एक राष्ट्रीय स्तर का तैराक चाय बेचकर अपना जीवन यापन करता है।

1987 में गोपाल ने पहली बार कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने 1988 और 1989 में केरल में आयोजित राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वह 1988 में BCA दानापुर में आयोजित राज्य चैम्पियनशिप में 100 मीटर बैकस्ट्रोक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर आए।

1990 में, वह डाक विभाग में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गए, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली। आज गोपाल गंगा में प्रशिक्षुओं को तैरना सिखाते हैं। उनका मानना ​​है कि इससे उनके अंदर का तैराक जीवित बना रहेगा। उनका कहना है कि उनके बेटे सनी कुमार और सोनू कुमार अच्छे तैराक हैं, लेकिन उन्होंने उनकी हालत देखकर तैराकी छोड़ दी। उनके दुकान में आने वाले ग्राहकों का मानना ​​है कि यह वास्तव में बहुत ही निराशाजनक है कि इतने अच्छे खिलाड़ी को आज सड़कों पर चाय बेचनी पड़ रही है।