माँ के जाने के बाद मन उचट गया और अपने गुरु की सलाह पर मैंने बॉलीवुड छोड़ने का फैसला लिया

New Delhi : दिवंगत अभिनेता शम्मी कपूर के बेटे आदित्य राज कपूर ने उन घटनाओं को याद किया है जिन्होनें उन्हें अपने घरेलू बैनर आर के फिल्म्स के साथ फिल्म उद्योग छोड़ने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने कहा कि उनकी माँ अभिनेता गीता बाली अचानक छोड़कर चली गयी और इस घटना ने उन्हें इस हद तक झकझोर दिया कि उन्होंने फ़िल्मी दुनिया को सदा के लिए अलविदा ही कह दिया । एक इंटरव्यू में, आदित्य ने कहा कि उन्होंने इस तकलीफ से उबरने के लिए अपने ’गुरुजी’ की सलाह ली । इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा, ये तो परिस्थितियां ऐसी बन गयी जिसके कारण उन्होंने  निर्देशक के रूप में उद्योग में लौटने के लिए मजबूर नहीं किया ।

उन्होंने स्पॉटबॉय को बताया कि “मैं 17 साल का था, मैं बिना किसी कारण के एक विद्रोही था और मैं अपनी फिल्म की शुरुआत करने जा रहा था,” “तब मैंने अपने आध्यात्मिक गुरु को पाया। उन्होंने मुझे उन जीवन-बदलते शब्दों को कहा – ‘फिल्म उद्योग छोड़ दो’। ”

आदित्य ने कहा, “उस समय, जब मुझे बॉबी में ऋषि (कपूर) के लॉन्च के ठीक बाद आरके बैनर में एक हीरो के रूप में लॉन्च किये जाने की योजना थी उसी समय मैंने बॉलीवुड छोड़ दिया। मैं राज साब की सहायता भी कर रहा था और फिल्म निर्देशक बनने की तैयारी कर रहा था। मेरे पिता ने बार-बार मेरे फैसले पर सवाल उठाए। पर मैं अडिग था। मेरे गुरुजी ने मुझे बिज़नेस में अपना भाग्य आजमाने का निर्देश दिया। उन्होंने मेरे लिए एक शिपिंग मैग्नेट योगेंद्र माधव लाल, राजन नंदा के साथ काम करने की व्यवस्था की। इसके बाद मैंने अपनी खुद की कंपनी शुरू की। 25 साल तक मैंने कभी सिनेमा नहीं देखा। यहाँ तक कि मैंने फिल्में देखना भी बंद कर दिया। इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद मेरे मन में इंडस्ट्री में फिर से लौटने का मोह जबरदस्त था ।

उन्होंने अपने गुरुजी को याद करते हुए कहा कि उनकी मृत्यु के बाद भी, मैंने फिल्म उद्योग में पीछे नहीं देखा। मेरे दुबई जाने के बाद ही मैंने फिल्मों में वापसी की। ”उन्होंने कहा कि जब वह 52 वर्षीय के रूप में मुंबई लौटे, तब शम्मी कपूर न सिर्फ एक पिता बल्कि एक मेंटोर की तरह उनका मार्गदर्शन कर रहे थे। “मैं एक अभिनेता बन गया … आखिरकार,” आदित्य ने कहा। “मेरे पिता ने मेरा हर शॉट प्रोमो, ट्रेलर, फिल्मों में देखा। 76 साल की उम्र में, उन्होंने मेरे करियर गाइड और मेंटर की भूमिका निभाई थी । मेरे पिता के अंतिम संस्कार में एक बार फिर पूरा कपूर खानदान एक साथ आया। मेरे पिता के जाने के बाद ऐसे लगा जैसे मेरे जीवन का एक चक्र पूरा हो गया । मेरे पिता ने मुझे जहाँ चाहा वहाँ जाने दिया और मेरी जो इच्छा थी, वह भी पूरी की। आज मैंने अपने दोनों बच्चों को समान स्वतंत्रता की अनुमति दी है। मेरे पिता ने हमें जीवन के कुछ सिद्धांतों को पालन करने के लिए मैनुअल लिखा था। ”
आदित्य (2010) दीवानगी इसी लाइफ में (2010), से यस टू लव (2012) और यमला पगला दीवाना 2 (2011) जैसी फिल्मों में नजर आए । वे आशुतोष गोवारीकर की सीरीज , एवरेस्ट में भी दिखाई दिए।

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