गोपालगंज के थावे में भक्त के सिर से प्रकट हुईं थीं मां दुर्गा,यहां लगता है श्रद्धालुओं का तांता

NEW DELHI :  GOPALGANJ बिहार का एक जिला है जहाँ गोपालगंज-हथुआ मार्ग से जब आप आगे बढ़ते हैं तो थोड़ी ही दूर चलने के बाद थावे नाम की एक जगह पड़ती है जो पूरे भारत में मां दुर्गा के मंदिर के लिए विख्यात है । यहाँ पर मां दुर्गा को  माता थावेवाली ,रहषु भवानी ,थावे भवानी और सिंहासिनी भवानी के नाम से  जाना जाता है । लोग कहते है कि माता दुर्गा भक्त रहषु के पुकार पर कामाख्या से चलकर कोलकाता और पटना होते हुए थावे पहुंचकर भक्त रहषु के, मस्तिष्क को दो फाड़ करके प्रकट होकर साक्षात दर्शन दी थी । देश के 52 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के बनने के पीछे की कहानी बड़ी ही रोचक है –जनश्रुतियो  के मुताबिक गोपालगंज जिले मे  हथुआ राज्य हुआ करता था, जहाँ का राजा मनन सिंह अपने आप को माता दुर्गा का सबसे बड़ा भक्त मानता था । एक बार उसके राज्य में भयंकर अकाल पड़ा,। लोग दाने-दाने के लिए तरसने लगे । इसी जिले के थावे नामक जगह पर माता दुर्गा का सच्चा भक्त रहषु रहा करता था जो अकाल की स्थिति में दिन में घास काटता और रात में माता रानी दुर्गा की कृपा से उसमें से अन्न निकालता और लोगों की भूख मिटाता । यह बात राजा मनन सिंह के पास पहुंची जो अपने आप को माता दुर्गा का सबसे बड़ा भक्त मानने के अहंकार में कहा कि हमारे अलावा माता दुर्गा किसी को भी परम भक्त नहीं मानतीं इसलिए रहषु को यह शक्ति नहीं मिल सकती। वह पाखण्ड कर रहा है और भक्त रहषु को चुनौती दी कि अगर पाखण्डी नहीं हो तो माता दुर्गा को बुलाकर दिखाओ । इस पर भक्त रहषु ने राजा को चेतावनी दी कि माता अगर यहाँ आएंगी तो सबकुछ तहस-नहस कर देंगी लेकिन राजा को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ और वह माता को बुलाने की जिद्द पर अड़ा रहा । इसके बाद रहषु ने माता दुर्गा से थावे आने की प्रार्थना की, जिसके बाद मां दुर्गा असम के कामाख्या से होते हुए रहषु के सिर को चीरते हुए प्रकट हुईं । जिस स्थान पर प्रकट हुईं, वहां माता दुर्गा का मंदिर बना । माता दुर्गा ने प्रकट होने के बाद कहा  कि भक्त रहषु का दर्शन किए बिना किसी भी भक्त को मेरा आशीर्वाद प्राप्त नहीं होगा । इसके बाद माता दुर्गा के मंदिर के पास भक्त रहषु का भी मंदिर बना जो आज भी विराजमान है ।राजा मनन सिंह की मृत्यु हो गई और महल तहस-नहस हो गए ,  जिसके खण्डहर आज भी विराजमान हैं ।

यहां भक्त किसी भी शुभ कार्य को शुरु करने के पहले और सम्पन्न करने के बाद माता का आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं ।मंदिर का गर्भ काफी प्राचीन है । तीन तरफ जंगलों से घिरा यह मंदिर आज भी बिना किसी छेड़छाड़ के जस का तस खड़ा है । नवरात्रि के समय यहां पर भक्तों की  काफी भीड़ उमड़ती है । इस मंदिर में भक्त माता को नारियल ,पेड़ा,चुनरी और लड्डू चढाते हैं । यहाँ की प्रसिद्ध मिठाई पडुकिया के नाम से जानी जाती है ।