आसमां नापना सिखाने वाले धोनी का बैट कुछ इंच दूरी नहीं नापकर करोड़ों आँखों में आंसू छोड़ गया

New Delhi: क्रिकेट की समझ न के बराबर है। क्रिकेट बस दो लोगों के चलते देखता था और अभी देखता हूँ एक युवराज और दूसरे महेंद्र सिंह धोनी। युवराज का छक्का और धोनी का दोनों विकेटों के बीच दौड़ने का जबरा फैन हूँ।  युवराज जब टीम में थे तब पूछ लेता था कि युवी पाजी ने कितने रन मारे और कितने छक्के जड़े। धोनी जब खेलते हैं तो बस इतना जान लेता हूँ कि उन्होंने कितने दौड़ लगाये। युवराज जो कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी को साथ ढोकर 2011 के वर्ल्ड कप में लगातार खेलते रहे। वो वर्ल्ड कप हम जीते भी। उस समय के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ही थे। हम जैसे लाखों लोग जो गाँव के फर्श को छोड़ अर्श को छूने शहर आते हैं उन सबके लिए धोनी एक प्रेरणा हैं।

धोनी जिन्होंने आसमान छूने की प्रेरणा दिया। धोनी को बतौर क्रिकेटर पहली नौकरी भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर के तौर पर मिली। इसके बाद वे एयर इंडिया की नौकरी करने लगे। इसके बाद वे एन श्रीनिवासन की कंपनी इंडिया सीमेंट्स में अधिकारी बन गए। पत्रकार राजदीप सरदेसाई अपनी किताब टीम लोकतंत्र में लिखते हैं – आज के धोनी कभी बिना रिजर्वेशन वाले डिब्बों में सफ़र करते थे और टायलेट के पास सो जाते थे। अपने संघर्ष के दिनों में उन्हें स्पोर्ट्स कोटा से दक्षिण-पूर्व रेलवे में नौकरी मिली थी। मात्र 3000 रुपये के वेतन पर वे खड़गपुर स्टेशन पर टिकट चेक करते थे।

आज धोनी क्या हैं? हम सब जानते हैं। बतौर कप्तान धोनी दुनिया के इकलौते ऐसे कप्तान हैं जो ICC के तीनों इवेंट्स के खिताबों पर कब्जा ज़माने में कामयाब रहे हैं। आसमान नापने की कला सिखाने वाले धोनी का बैट कल जब विकेट लाइन से कुछ इंच पीछे रह गया , तो करोड़ो क्रिकेट प्रेमी आश्चर्य में पड़ गए।

मैदान से लौटते वक़्त सिर्फ धोनी ही उदास नहीं थे उनका उदास चेहरा देख करोड़ो भारतीय रो रहे थे। कल के मैच के पहले कब सुना था कि धोनी रन आउट हुए ! याद नहीं। कल उनका बैट विकेट लाइन से कुछ इंच दूर रह गया और उनके आउट होते ही करोड़ो भारतीयों का वर्ल्ड कप का सपना टूट गया। कल भारतीय क्रिकेट टीम सेमीफइनल में न्यूजीलैंड के हाथों हार गई। हम वर्ल्ड कप से बाहर हो गए।

शिवमंगल सिंह सुमन की एक कविता की कुछ पंक्तियाँ
क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही

हम अंतिम तक लड़े। और यही बात सबसे सुन्दर है। क्योंकि हार और जीत तो जीवन का एक अभिन्न अंग है। किसी एक को जीतना और किसी एक को हारना ही है।