आतंकवाद पर इमरान खान का कुबूलनामा, कहा- 1980 में पाक ने मुजाहिदिनों को दी थी ट्रेनिंग

New Delhi: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि अफगानिस्तान में सोवियत संघ से लड़ने के लिए पाकिस्तान ने 1980 के दशक में मुजाहिदीनों को प्रशिक्षित किया था।

आरटी के साथ एक इंटरव्यू में, खान ने आगे कहा कि मुजाहिदीनों को अमेरिका द्वारा फंडिंग दी गई थी और पाकिस्तानियों द्वारा प्रशिक्षित किया गया था।

इंटरव्यू में खान ने कहा, “80 के दशक में हम इन मुजाहिदीन लोगों को सोवियत के खिलाफ जिहाद करने के लिए प्रशिक्षित कर रहे थे जब उन्होंने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इसकी फंडिंग अमेरिका के सीआईए ने की थी।”

1980 के दशक में अफगानिस्तान में होने वाले संघर्ष के बारे में बात करते हुए, खान ने कहा कि पाकिस्तान को तटस्थ रहना चाहिए था क्योंकि ये अब उनके खिलाफ हो गए हैं।

उन्होंने कहा, “अब एक दशक बाद जब अमेरिका खुद अफगानिस्तान में पहुंचा तो यह अब जिहाद नहीं रह गया है। यह अब आतंकवाद है। यह एक बड़ा विरोधाभास था और मैंने दृढ़ता से महसूस किया कि पाकिस्तान को न्यूट्रल होना चाहिए था क्योंकि इसमें शामिल होकर ये समूह हमारे खिलाफ हो गए।”

उन्होंने आगे कहा, ”हमने अपने 70,000 लोगों को खो दिया। हमको 100 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। अंत में, अमेरिका ने हम पर अफगानिस्तान में सफल नहीं होने के लिए दोषी ठहराया गया। मुझे लगा कि यह पाकिस्तान के साथ बहुत अनुचित हुआ।”

बता दें कि गुरुवार को पाकिस्तान के गृहमंत्री एजाज अहमद शाह ने स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जमात- उत- दावा पर अरबों रुपये खर्च किए हैं ताकि वह मुख्यधारा में बना रहे। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में ये उनके इशारे पर ही लड़ रहे थे और अब उनकी जिम्मेदारी बनती है कि उन आतंकियों को नौकरी और पैसे दें।

बता दें कि इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तालिबान के साथ अफगान शांति वार्ता को रद्द कर दिया था। यह वार्ता पाकिस्तान की मदद से आयोजित की गई थी। बता दें कि काबुल में अमेरिकी सैनिक की हत्या किए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतिम समय पर शांति वार्ता को रद्द कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप और तालिबान के बड़े नेताओं के बीच ये बैठक कैंप डेविड में होनी थी, जहां अक्सर अमेरिकी राष्ट्रपति बड़ी और अहम बैठकें करते हैं।

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