सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील बोले,’हम फैसले से संतुष्ट नहीं’

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से अयोध्या विवादित जमीन राम लला को दी। मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में कहीं और सरकार द्वारा पांच एकड़ जमीन दने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ज़फरयाब जिलानी संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ,’हम फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन हम संतुष्ट नहीं हैं, हम आगे की कार्रवाई के बारे में सोचेंगे’।

रामलला के पास रहेगी विवादित जमीन, मुस्लिम पक्ष को मिलेगी दूसरी जगह मिलेगी। इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ,’1992 में बाबरी मस्जिद को ढहाना और 1949 में मूर्तियां रखना गैरकानूनी था। मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाएगा। फैसले का सम्मान करते हुए हिन्दू महासभा के वकील वरुण कुमार सिन्हा ने कहा- यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले के साथ, सर्वोच्च न्यायालय ने विविधता में एकता का संदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। हम खुदाई में मिले सबूतों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। खुदाई में जो मिला वो इस्लामिक ढांचा नहीं था। ASI ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की बात कही है। ASI ने मस्जिद या ईदगाह का जिक्र नहीं किया है। अयोध्या में राम के जन्म के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया।

40 दिन तक हुई रोजाना सुनवाई : इस मामले की 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हुई जो 16 अक्टूबर को खत्म हुई। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पीठ में न्यायमूर्ति बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर थे।