क्या भी’षण जल संकट के दौर से गुजर रहा है भारत ?

New Delhi: पानी मनुष्य के जीवन के लिए सबसे आवश्यक जरूरतों में से एक है इसिलिए कवि रहीम ने लिखा है कि ‘‘रहिमन पानी राखिये बिना पानी सब सून। पानी गये न उबरै मोती मानुष चून।’’ आबादी के लिहाज से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश भारत भी जल संकट से जूझ रहा है। यहाँ जल संकट की समस्या वि’कराल हो चुकी है। न सिर्फ शहरी क्षेत्रों में बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी जल संकट बढ़ा है।

तमिलनाडु में सूखे के चलते आईटी कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए
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वर्तमान समय में देश की जनसंख्या प्रतिवर्ष 1.5 करोड़ प्रतिशत बढ़ रही है। ऐसे में वर्ष 2050 तक भारत की जनसंख्या 150 से 180 करोड़ के बीच पहुँचने की सम्भावना है। ऐसे में जल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना कितना दुरुह होगा, समझा जा सकता है। आंकड़े बताते हैं कि स्वतंत्रता के बाद प्रतिव्यक्ति पानी की उपलब्धता में 60 प्रतिशत की कमी आयी है।

भारत अपने इतिहास के सबसे गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है देश में करीब 60 करोड़ लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं. करीब दो लाख लोग स्वच्छ पानी न मिलने के चलते हर साल जान गंवा देते हैं.नीति आयोग की जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा जारी की गई ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (सीडब्ल्यूएमआई)’ रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह संकट आगे और गंभीर होने जा रहा है।रिपोर्ट में कहा गया है, ‘2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध जल वितरण की दोगुनी हो जाएगी. जिसका मतलब है कि करोड़ों लोगों के लिए पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा और देश की GDP में 6 प्रतिशत की कमी देखी जाएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 70 प्रतिशत प्रदूषित पानी के साथ भारत जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में 120वें पायदान पर है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी की कमी की एक सबसे बड़ी वजह यह है कि सरकार ने जल संरक्षण की दिशा में अब तक कोई ठोस नीति नहीं बनाई है. इसके चलते बारिश का 65 फीसदी बह कर समुद्र में चला जाता है.
पानी की कमी एक वैश्विक समस्या का रूप ले चुकी है। दुनिया का हर देश इस समस्या से जूझ रहा है। अमेरिका से लेकर मध्यपूर्व और भारत से लेकर अफ्रीका के देशों में पानी की समस्या लगातार वि’कराल होती जा रही है। पानी की इस समस्या को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अगला विश्व यु’द्ध पानी को लिए होने वाला है।