दृष्टिबाधितों के लिए ”विजन” बन जाएगा विजन चश्मा

NEW DELHI : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के पांच विद्यार्थियों ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए ”विज़न” चश्मा बनाया है. इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। दृष्टिबाधित लोगों के लिए विज़न चश्मा किसी अजूबे से कम नहीं है. छात्रों ने सेंसर युक्त चश्मा तैयार किया है जिसे पहनते ही ” विज़न ” बोलने पर चश्मे से जुड़े हैडफ़ोन के जरिये चश्मा लगाने वाले को यह पता चल जाएगा की सामने क्या है। मान लीजिये , अगर दृष्टिबाधित के सामने कोई गड्ढा है तो उसे गड्ढा सुनाई दे जाएगा। इससे वह एकदम सतर्क हो जाएगा। दृष्टिबाधित लोगों के लिए यह चश्मा आँख का काम करेगा।

एनआईटी के कम्प्यूटर साइंस ब्रांच के विद्यार्थी विनय खोब्रागढ़े, उपासना मिश्रा, सिद्धार्थ श्रीवास्तव, श्रुति पांडेय व नितिशा सिंह ने यह चश्मा तैयार किया है। इसे उन्होंने ‘विजन’ नाम दिया है। छात्रों ने बताया की सभी तरह की वस्तुओं के चित्रों को इस सॉफ्टवेयर में अपलोड कर दिया गया है जिससे कोई भी ऐसी वास्तु का सामना होता है जिससे दृष्टिबाधितों को खतरा है तभी यह चश्मा उन्हें सतर्क कर देगा। इसमें कंप्यूटर की भाषा पैथान का उपयोग किया गया है।  इस साफ्टवेयर में एक चिप डाल दी गई है, जिसका कनेक्शन चश्मे से है। चिप से हेडफोन को भी जोड़ दिया गया है।

विज़न चश्मा ऐसे करता है काम

साफ्टवेयर में सभी प्रकार की वस्तुओं की इमेज अपलोड है। दिव्यांग चश्मा लगाने के बाद जैसे ही ‘विजन’ बोलता है, चश्मे में लगा सेंसर युक्त कैमरा एक्टिव हो जाता है। सामने जो भी वस्तु होती है, उसकी इमेज साफ्टवेयर में अपलोड इमेज से मेल खाते ही चिप के जरिए सेंसर युक्त कैमरे तक पहुंच जाती है और वह जो भी वस्तु होती है, उसके बारे में जानकारी हेडफोन के जरिए मिल जाती है। यह सबकुछ मिली सेकंड के भीतर ही हो जाता है। यानी दृष्टिबाधित चश्मा लगाने के बाद यदि आराम से आगे बढ़े तो उसे सामने आने वाली हर वस्तु एकाएक पता चलती जाएगी। इस तरह वे सुरक्षित चल सकते हैं।