VHP उपाध्यक्ष का बयान, पहले ही आ जाता राममंदिर पर फैसला, लेकिन कांग्रेस ने डाली रूकावट

New Delhi: loksabha elections 2019 को लेकर राजनीति पार्टी सक्रिय हैं, हर कोई अपने एजेंडा बनाकर उस पर काम कर रहे हैं। इस कड़ी में बीजेपी के तमाम एजेंडे में शामिल राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा गले की फांस बन चुका हैं, क्योंकि पिछले चुनाव में भी बीजेपी राम मंदिर के सहारे ही सत्ता में काबिज हो पाई थी। लेकिन अब यही राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी की राह में मुश्किलें खड़ा कर रहा हैं। लोगों की मांग हैं कि राम मंदिर पर कानून लाया जाए और जल्द ही राम मंदिर का निर्माण कराया जाये।

विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर न बनने से हिंदू समाज आक्रोशित है। इसी का परिणाम है कि 25 नवंबर को अयोध्या में संत सभा हो रही है। अगर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया होता तो शायद ऐसे संत सभा की जरूरत नहीं होती। चंपत राय ने कहा कि हिंदुस्तान को हिंदुओं के प्राथमिकताओं को समझना होगा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए आधे से ज्यादा पत्थरों की तराशी भी हो चुकी है।

Champat Rai

चंपत राय ने कहा कि जिस सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की अपेक्षा है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई को टाल रहा हैं, जिससे विश्व हिंदू परिषद को चोट पहुंच रही। वही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सितम्बर 2018 को ही फैसला आ गया होता,लेकिन इसे जानबूझ कर लोकसभा चुनाव तक ले जाया गया। बिना नाम लिए इशारों में कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए चंपत राय ने कहा कि छल कपट से इस मुकदमे को खींचकर लोकसभा चुनाव तक लाया गया। चंपत राय ने चेतावनी देते हुए कहा कि 9 दिसंबर को 5 लाख हिंदू दिल्ली पहुंचेगें।

इस पर हाल ही में कर्नाटक के अल्पसंख्यक मंत्री जमीर अहमद खान का बयान सामने आया हैं। जमीर अहमद खान ने कहा कि कर्नाटक के मुसलमान ही नहीं बल्कि पूरे देश में मुसलमान राम मंदिर का निर्माण चाहते हैं, कोई भी मुसलमान राम मंदिर के खिलाफ नहीं हैं। हम चाहते हैं कि सरकार राम मंदिर का निर्माण करें, लेकिन हमारी मस्जिद जिसे शहीद किया गया था, वह भी बनाई जानी चाहिए। हम राम मंदिर के खिलाफ नहीं हैं, हम सिर्फ हमारे अधिकार की मांग कर रहे हैं।