अटल बिहारी वाजपेयी ने सड़क से संसद तक राम मंदिर के लिए बुलंद की आवाज..अब पूरा हुआ उनका सपना

New Delhi : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद से लेकर सड़क तक राम मंदिर के लिए आवाज बुलंद की। 1996 में 13 दिनों की सरकार के विश्वास मत परीक्षण के दौरान भी उन्होंने कहा था कि चूंकि जनता ने उन्हें बहुमत नहीं दिया है, इसलिए वो सहयोगी दलों के साथ आम धारणा बनाकर शासन करने में विश्वास रखते हैं। अगर बीजेपी को बहुमत मिला तो राम मंदिर, अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।

एक अन्य सभा को संबोधित करते हुए वाजपेयी जी ने कहा था, “एक विदेशी राजनयिक भारत आए थे, उन्होंने पूछा था कि ये राम मंदिर विवाद क्या है? हमने कहा कि भगवान श्रीराम कहां पैदा हुए थे, ये विवाद चल रहा है। और जहां पैदा हुए थे, वो स्थान उनके मंदिर के लिए प्रयुक्त किया जाय या नहीं? वो मुसलमान थे और इंडोनेशिया से आए थे। कहने लगे, हम तो समझते थे कि राम के लिए पूरे भारत में आदर होगा, सम्मान होगा।”

कोर्ट ने नवंबर में फैसला सुनाते हुए कहा कि राम लला का दावा बरकरार है। पक्षकार गोपाल विरसाद को पूजा का अधिकार मिलेगा। कोर्ट ने मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिमों को दूसरी जगह दी जाए। कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिमों को दूसरी जगह देने के लिए ट्रस्ट बनाया जाए। मुस्लिमों को 5 एकड़ जमीन अलॉट की जाए। कोर्ट ने कहा- अंग्रजों के समय में नमाज को कोई सबूत नहीं। विवादित जमीन पर मुस्लिम दावा नहीं साबित कर पाए। हिंदू सीता रसोई में पूजा करते थे। मुस्लिम पक्ष का जमीन पर कोई विशेष कब्जा नहीं है।

CJI ने कहा कि 1949 में दो मूर्तियां रखी गईं। उन्होंने कहा कि मस्जिद बाबर के दौर में बनाई गई। मस्जिद मीर बाकी ने बनाई थी। कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा भी खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़े को सेवायत का अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। हम खुदाई में मिले सबूतों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। खुदाई में जो मिला वो इस्लामिक ढांचा नहीं था। ASI ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की बात कही है। ASI ने मस्जिद या ईदगाह का जिक्र नहीं किया है। अयोध्या में राम के जन्म के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया।

40 दिन तक हुई रोजाना सुनवाई : इस मामले की 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हुई जो 16 अक्टूबर को खत्म हुई। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पीठ में न्यायमूर्ति बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर थे।