अमेरिका के इस कदम से भारतीयों को हो सकता है नु’कसान

New Delhi: अमेरिका जाकर जॉब करने वाले भारतीयों के लिए एक बुरी खबर है। अमेरिका की ट्रम्प सरकार भारतीयों को एच 1 बी वीजा देने के लिये लिमिट 15 प्रतिशत तक निर्धारित कर सकती है। अगर अमेरिका यह निर्णय लेता है तो इसका सबसे ज्यादा असर सिलिकॉन वैली में स्थित आईटी सेक्टर की कंपनियों में काम कर रहे भारतीयों के साथ साथ टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों पर भी असर पड़ेगा। इसके चलते गुरुवार को शेयर बाजार में इन कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका हर साल 85000 एच 1 बी वीजा जारी करता है जिसका लगभग 75 प्रतिशत लाभ भारतीयों को मिलता है। गौरतलब है कि अभी तक अमेरिका द्वारा किसी भी देश के लिये वीज़ा आवंटन के लिये किसी भी प्रकार की सीमा निर्धारित नहीं है। फिर भी इसका सबसे ज्यादा लाभ भारतीयों को ही मिलता है।
रॉयटर्स के अनुसार अमेरिका उन देशों के लिये वीज़ा आवंटन की सीमा निर्धारित कर रहा है जहाँ विदेशी कंपनियों के डेटा को स्थानीय क्षेत्र में स्टोर करने के लिये मजबूर किया जाता है। गौरतलब हैं कि भारत में आरबीआई द्वारा पिछले वर्ष डेटा लोकलाइजेशन पॉलिसी लागू की थी। इसके तहत वीजा, मास्टरकार्ड जैसी विदेशी कंपनियों को ट्रांजेक्शन से जुड़े डेटा विदेशी सर्वर की बजाय भारत में ही स्टोर करने होते हैं। भारत की इस पॉलिसी के कारण वहाँ की कंपनियों और सरकार को आपत्ति है।
टीसीएस और इन्फोसिस जैसी प्रमुख कंपनियां एच-1बी वीजा पर अपने इंजीनियर और डेवलपर को अमेरिका भेजती हैं। भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। भारतीय आईटी इंडस्ट्री 150 अरब डॉलर (10.5 लाख करोड़ रुपए) की है।