सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा मिलने पर बोलीं हरसिमरत कौर, आखिरकार इंसाफ का पहिया चल ही पड़ा

NEW DELHI: 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में आज हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने 6 सिखों की हत्या करने वाले आरोपी सज्जन कुमार को दोषी करार दिया और उम्र कैद की सजा सुनाई। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने बयान दिया। हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं कि उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के अनुरोध पर 1984 के नरसंहार की जांच के लिए साल 2015 में एसआईटी का गठन किया। यह ऐतिहासिक फैसला हैं। आखिरकार इंसाफ का पहिया चल ही पड़ा हैं।

वहीं फैसला आने का बाद बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। संबित पात्रा ने कहा कि कमलनाथ जी का नाम एफिडेविट और सबूतों के साथ-साथ नानावती आयोग को दी गई रिपोर्ट में भी आया था। एक ऐसे शख्स को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया हैं, जो सिख-विरोधी दंगों में शामिल रहा हैं। राहुल गांधी को उन्हें पार्टी से निकाल देना चाहिए।

Union Minister Harsimrat Kaur Badal

इसके अलावा, वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। मेरे जैसे लोग जिन्होंने इसको देखा है, उनके लिए शायद यह सबसे बड़ा नरसंहार है। उस समय की कांग्रेस सरकार ने लगातार मामले को दबाने की कोशिश की। सज्जन कुमार सिख-विरोधी दंगों का प्रतीक थे। अब हमें उम्मीद है कि अदालतें सिख-विरोधी दंगों के सभी मामलों के जल्द निपटारे के लिए काम करेंगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बारे में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सिख समुदाय का मज़बूती से मानना है कि वह इसमें शामिल रहे थे। वहीं इस फैसले का एचएस फुल्का और मंजिंदर सिंह ने कोर्ट के बाहर खुशी मनाई।

आपको बता दें कि इस मामले में निचली अदालत ने फैसला सुनाते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। इस बाद निचली अदालत के देने के बाद दिल्ली में कई याचिकाएं दाखिल की गई। जस्टिस एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने 29 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर, रिटायर नेवी अफसर कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल और दो अन्य को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक नवंबर 1984 को दिल्ली छावनी के राजनगर क्षेत्र में एक परिवार के पांच सदस्यों के हत्या से जुड़े मामले में दोषी ठहराया और तीन-तीन साल की कारावास की सजा सुनाई, लेकिन सज्जन कुमार को बरी किया था।