ट्विटर ने चीनी नीतियों का समर्थन करनेवाले 1.7 लाख अकाउंट बंद किये, कहा- इनका बर्ताव प्रवक्ता जैसा

New Delhi : ट्विटर ने चीन और चीन सरकार के समर्थन करनेवाले करीब एक लाख 70 हजार अकाउंट बंद कर दिये हैं। इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने गुरुवार रात एक बयान में यह जानकारी दी। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये सारे अकाउंट्स साफ तौर पर चीन की नीतियों और कदमों को जायज ठहराने वाले थे। हॉन्गकॉन्ग में चीन विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा कोविड-19 पर चीन के रवैये की दुनिया के कई देशों में आलोचना हो रही है। लेकिन, ट्विटर पर लाखों अकाउंट्स चीन को सही ठहरा रहे थे।

हॉन्गकॉन्ग में कई महीनों से लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन चल रहा है। कई बार यह काफी हिंसक भी हुआ। पिछले दिनों चीन ने यहां के लिए नया कानून पारित किया। दुनियाभर में इसकी आलोचना हुई। लेकिन, ट्विटर पर हजारों अकाउंट्स ऐसे थे जो चीन के कदम को सही ठहरा रहे थे। दूसरा मुद्दा कोविड-19 से जुड़ा है। अमेरिका समेत कई देश चीन पर इसकी सच्चाई छिपाने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन, ट्विटर पर ऐसे कई अकाउंट्स थे जिनके जरिये यह दावा किया जा रहा था कि चीन ने सही वक्त पर सही कदम उठाये।
कंपनी ने एक बयान में चीन की शह पर चलाये जा रहे इन अकाउंट्स पर सख्त रुख दिखाया। कहा- हमने जो अकाउंट्स बंद किए हैं वो दुनिया में चीन और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों को सही ठहरा रहे थे। इनके जरिए यह साबित करने की कोशिश की जा रही थी कि चीन हर मामले में सही है।
चीन में आधिकारिक तौर पर ट्विटर ब्लॉक है। लेकिन, वीपीएन नेटवर्क के लिए कुछ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। ट्विटर ने इन एक लाख 70 हजार अकाउंट्स को बंद करने के पहले ऑस्ट्रेलिया समेत कुछ देशों में हुए रिसर्च को भी देखा। कंपनी ने बयान में कहा- इन अकाउंट्स पर सिर्फ चीन की भाषा बोली जा रही थी यानी चीन का ही पक्ष रखा जा रहा था। 23 हजार 750 अकाउंट्स के यूजर्स का बर्ताव तो चीन के प्रवक्ता जैसा था। इसके अलावा करीब 1.5 लाख अकाउंट ऐसे थे, जिन पर चीन को ही सही ठहराया जा रहा था।

ट्विटर ने रूस और तुर्की से जुड़े कुछ अकाउंट को भी बंद किया है। इन पर भी वही आरोप हैं जो चीन के मामले में लगाए गए हैं। रूस के करीब एक हजार अकाउंट्स को बंद किया गया है। ये सत्तारूढ़ पार्टी का समर्थन कर रहे थे। तुर्की में 7340 अकाउंट्स को बंद किया गया है। ये राष्ट्रपति रिसेप तैय्यप एर्डोगन की नीतियों का प्रचार और समर्थन कर रहे थे।

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