डॉक्टर्स हड़ताल :मरीज़ों का इलाज डॉक्टर का प्रथम दायित्व है : दिग्विजय सिंह

New Delhi : कोलकाता के NRS Medical College and Hospital में एक मरीज के परिजनों द्वारा उनके दो सहयोगियों पर हमला करने और गंभीर रूप से घायल होने के बाद पश्चिम बंगाल के डॉक्टर एक सप्ताह से हड़ताल पर हैं। हड़ताल को पूरे देश भर में समर्थन मिल रहा है। दिल्ली के एम्स जैसे सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी अस्पतालों के डॉक्टर्स भी अब इस आंदोलन में शामिल हुए। मध्य-प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल को कांग्रेस के नेता और मध्य-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अनुचित ठहराया है। दिग्विजय ने एक ट्वीट के माध्यम से लिखा है कि – “मप्र में तो डॉक्टरों की सुरक्षा का क़ानून है फिर हड़ताल क्यों? मप्र शासन को क़ानून को सख़्ती से लागू करना चाहिये। मरीज़ों का इलाज डॉक्टर का प्रथम दायित्व है। जो इसे राजनैतिक रूप दिया जा रहा है वह अनुचित है”।

 

बंगाल के डॉक्टरों की मुख्य माँग है कि -अस्पतालों में सशस्त्र सुक्षाबलों की तैनाती की जाए। दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में दावा किया है कि डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर मध्य-प्रदेश में पहले से ही कानून है।

भोपाल के के स्थानीय खबर के मुताबिक़ – भोपाल में एम्स में फैकल्टी मेंबर, रेसीडेंट डॉक्टर व जूनियर डॉक्टर सोमवार सुबह 6 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक ओपीडी में मरीज नहीं देखेंगे। ऑपरेशन भी टाल दिए गए हैं। डॉक्टर सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं देंगे। गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हमीदिया और सुल्तानिया अस्पताल में भी ओपीडी में इलाज नहीं मिलेगा।

कैसे शुरू हुआ मामला – बंगाल के NRS मेडिकल कॉलेज में सोमवार को इलाज के दौरान 85 वर्षीय एक वृद्ध की मौत हो जाती है उसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है। मृतक के परिवार ने अस्पताल में तोड़-फोड़ शुरु कर दी थी। डॉक्टरों का कहना है ‘मृतक पहले से ही ह्रदय रोग से पीड़ित था। हमने बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन हम बचा नहीं पाए।’ दिग्विजय के इस ट्वीट को retweet करते हुए कांग्रेस के नेता आचार्य प्रमोद ने लिखा है कि – “क्यूँ कि म.प्र. सरकार “केंद्र” सरकार को “अच्छी” नहीं लगती”।