‘सुप्रीम’ जजों की रार पर देश के वरिष्ठ पत्रकारों की राय

‘सुप्रीम’ जजों की रार पर देश के वरिष्ठ पत्रकारों की राय

By: shailendra shukla
January 12, 21:18
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई द्वारा मीडिया के समक्ष आकर सीधे-सीधे सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा पर आरोप लगाने के बाद देश की राजनीति में उथल-पुथल मचा हुआ है।

इन सबके बीच लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जानेवाले मीडिया जगत के दिग्गजों ने भी इस मामले पर चिंता जाहिर की है। कुछ ने कटाक्ष किया है तो कुछ न तंज कसा है। कुछ ने जजों के इस कदम का स्वागत किया है तो कुछ ने इसे गलत भी बताया है। आइए आपको बताते हैं कि देश के वरिष्ठ पत्रकार इस मामले में क्या सोच रहे हैं:

प्रेस वार्ता के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज

वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा, ‘जब भी कोई बड़ा सवाल उठता है, ‘भक्त संप्रदाय’ के लोग पुराने दौर में हुई वैसी ग़लतियों का हवाला देने लगते हैं। जैसे अभी कुछ लोग इंदिरा गांधी के दौर में न्यायपालिका में दख़लंदाज़ी और जजों की बहाली में उनकी भूमिका पर रिसर्च करके ठेल रहे हैं...’

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

अपने बेबाक और अनोखे अंदाज के लिए पहचाने जानेवाले वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘सत्य ताले में बंद हो सकता है मगर उसमें अंतरात्मा को चीर देने की शक्ति होती है। जज लोया की मौत ने आज सुप्रीम कोर्ट को एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा कर दिया है। भाषा और शब्दों पर न जाइये...’

वरिष्ठ पत्रकार पूण्य प्रसून बाजपेयी ने सीधे-सीधे मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने एक के बाद एक दो मैसेज अपने फेसबुक पेज पर डालें हैं। एक में उन्होंने लिखा, ‘नरेंद्र दास दामोदर मोदी जी ऐसे पहले पीएम बनें, जब उनके रहते सुप्रीम कोर्ट के चार जजों को पहली बार मीडिया के सामने आकर कहना पड़ा- "लोकतंत्र खतरे में है।" जय मां भारती! वंदे मातरम कहते रहो!’

दूसरे मैसेजे में उन्होंने लिखा, ‘प्रजातंत्र को डेंगू हो गया है... कड़वा नीम से भी बात नहीं बनेगी...’

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