भारत के बिल गेट्स और सबसे बड़े दानवीर अजीम प्रेमजी ऑटो से सफर करने में भी नहीं करते गुरेज

New Delhi: अगर आपने महाभारत पढ़ी, देखी या सुनी है तो कर्ण के बारे में भी सुना होगा। उस समय के सबसे बड़े दानी थे, कर्ण। आज के जमाने की बात करें तो सबसे बड़े दानवीर हैं अजीम प्रेमजी। उनको भारत का बिल गेट्स भी कहा जाता है। माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स, दिग्गज निवेशक जॉर्ज सोरोस और वॉरेन बफेट जैसे दुनिया के सबसे बड़े दानवीरों की लिस्ट में प्रेमजी का नाम भी शामिल है।

अजीम प्रेमजी देश की दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो के चेयरमैन हैं। उन्होंने इस साल मार्च में ही 52,750 करोड़ रुपए की वैल्यू के 34% शेयर दान किए थे। यानी अब तक वे शेयर्स से होने वाली अपनी 67% कमाई दान कर चुके हैं। जितना वो कमाते हैं, उसका बड़ा हिस्सा दान करते हैं।

आज इन्हीं सादगी पसंद  और आधुनिक जमाने के दानवीर कर्ण अजीम प्रेमजी का जन्मदिन है।

अजीम प्रेमजी का जन्म मुंबई के एक गुजराती मुस्लिम परिवार में 24 जुलाई 1945 को हुआ था। अजीम प्रेमजी के पूर्वज बर्मा में रहते थे और चावल का कारोबार करते थे। कुछ कारणों से परिवार भारत में आ गया और गुजरात के कच्छ में रहने लगा। यहां भी पहले अजीम के पिता एम.एच प्रेमजी ( मोहम्मद हाशिम प्रेमजी) ने चावल का कारोबार किया। बाद में अंग्रेजों की नीतियों से परेशान होकर उन्होंने वनस्पति घी के कारखाने की शुरुआत की। इस तरह 29 दिसंबर 1945 को वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड कंपनी अस्तित्व में आई। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र के जलगांव जिले के अमलनेर गांव में की गई थी। अगर आज इस गांव की बात करें तो 2.88 लाख आबादी वाले इस गांव के लोगों के पास विप्रो के 3% शेयर हैं। इनका मूल्य करीब 4,750 करोड़ रुपए है।

यही कंपनी बाद में विप्रो के नाम से जानी गई। एम.एच. प्रेमजी भारत के बड़े व्यापारी बन चुके थे। जब देश का विभाजन हुआ तो मोहम्मद अली जिन्ना ने उनको एक प्रस्ताव दिया। यह था कि पाकिस्तान चलकर वे वित्त मंत्री का पद संभालें लेकिन प्रेमजी ने इसको ठुकरा दिया।

21 साल की उम्र में संभाला बिजनेस

वर्ष 1966 में अजीम प्रेमजी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। 11 अगस्त को उनके पास भारत से एक फोन कॉल आया। उनकी मां गुलबानू ने उन्हें पिता की मौत की खबर दी। प्रेमजी के सर से पिता का साया उठने के बाद उनको अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी थी। 21 साल की उम्र में उन्होंने फैमिली बिजनेस को अपने हाथों में ले लिया।

जब अजीम प्रेमजी ने कंपनी संभाली तब कंपनी का सालाना रेवेन्यू लगभग 1.30 करोड़ रुपये था। कई सालों तक उन्होंने कंपनी को अच्छे से संभाला लेकिन वह कुछ अलग, कुछ नया करना चाहते थे। उस समय भारत में कंप्यूटर की शुरुआत हुुई ही थी। इससे उनको लगा कि कंप्यूटर भविष्य में काम करने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आयेंगे। इसी आइडिया के साथ उन्होंने 1981 में कंप्यूटर बिजनेस सी की शुरुआत की। शुरुआत में प्रेमजी ने हार्डवेयर और सॉफ्टेवेयर दोनों पर फोकस किया। बाद में हार्डवेयर पर फोकस घटाकर सॉफ्टवेयर पर बढ़ा दिया था।

      जिंदगी में कभी जीत मिलती है, कभी हार। सबसे जरूरी बात यह है कि जब आप हार जाएं तो हार से मिला सबक न भूलें।

                                                                               – अजीम प्रेमजी

आज विप्रो देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। लंबे समय तक यह टीसीएस और इंफोसिस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी थी। पिछले साल विप्रो ने 8.5 अरब डॉलर का रेवेन्यू हासिल किया था। अब 53 साल बाद प्रेमजी ने कंपनी छोड़ने का फैसला लिया है। इन 53 सालों में कंपनी का रेवेन्यू 45,000 गुना बढ़ा है। मार्केट कैप में भी 26 हजार गुना बढ़ोतरी हुई है।

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन

अजीम प्रेमजी अपनी मां के चैरिटेबल प्रोग्राम से प्रेरित थे इसलिए उन्होंने 2001 में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना की। ये संस्था शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही है। इसका लक्ष्य स्कूलों और शिक्षा के सिस्टम को सुधारना है। यह फाउंडेशन कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पुडुचेरी, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों में सक्रिय है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने 2010 में अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। यह नॉट-फॉर-प्रॉफिट वेंचर है।

 

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन

73 वर्षीय प्रेमजी ऐसे पहले भारतीय हैं जिन्होंने ‘द गिविंग प्लेज इनीशिएटिव’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल की शुरुआत बिल गेट्स और वॉरेन बफेट ने की थी। इसके तहत अपनी 50 फीसदी संपत्ति परोपकारी कार्य के लिए देने का वादा किया जाता है।

सादा लाइफस्टाइल 

अजीम प्रेमजी देश में यात्रा के दौरान इकोनॉमी क्लास में ही सफर करते हैं। वह लग्जरी होटलों की जगह कंपनी गेस्ट हाउस में ठहरना पसंद करते हैं। अगर एयरपोर्ट आना- जाना हो तो अपनी कार या टैक्सी के बजाय ऑटो से भी जाने में गुरेज नहीं करते। स्ट्रीट फूड खाने से भी उनको कोई परहेज नहीं है। वह अक्सर मुंबई में बड़ा पाव खाने चले जाया करते थे।

जब प्रेमजी ने रिश्वत देने से कर दिया था इनकार

1987 की बात है। विप्रो ने अपने तुमकूर (कर्नाटक) कारखाने के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया। कर्मचारी ने इसके लिए एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी। प्रेमजी ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नियम से सप्लाई नहीं मिलेगी तो हम अपनी बिजली बना लेंगे। विप्रो ने जेनरेटर से काम चलाया जिससे 1.5 करोड़ रु. का नुकसान हुआ।

यही बातें उनको दूसरों से अलग बनाती हैं। 53 साल से विप्रो को संभाल रहे अजीम प्रेमी 30 जुलाई को रिटायर हो जायेंगे। वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और फाउंडर चेयरमैन के तौर पर बोर्ड में रहेंगे। उनके बड़े बेटे रिशद प्रेमजी विप्रो के नए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनेंगे।

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