शराब के एक ब्रांड का नाम पाने वाले जॉनी वॉकर ने ताउम्र शराब को हाथ नहीं लगाया

“सर जो तेरा चकराये
                          या दिल डूबा जाये
                          आजा प्यारे पास हमारे”

यह गाना 1957 में आई फिल्म प्यासा का है। इस गाने की सबसे ख़ास बात यह है कि इसे हीरो पर नहीं फिल्म के कॉमेडियन पर फिल्माया गया। उस दौर में कोई गाना फिल्म के नायक के अलावा किसी और पर नहीं फिल्माए जाते थे। जॉनी वॉकर। एक समय के मशहूर कॉमेडियन चार्ली चैप्लीन का एक चेला। जो अपने गुरु जैसे ही सिनेमा हॉल में दर्शकों के पेट में दर्द उपाट देता था। फ़िल्मी पर्दे पर एक ऐसा चेहरा जो नायकों के बराबर ही तालियाँ बटोरता था। अपने चालीस साल के करियर में जॉनी ने करीब 300 फिल्मों में काम किया। कॉमेडियन पर गाने फिल्माने की शुरुआत जॉनी से ही शुरू हुई थी। जॉनी का करियर जब उफान पर था तब उन्हें फिल्म के नायक से ज्यादा पैसा मिलता था।

मध्यप्रदेश में इंदौर के एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में जन्में बदरूदीन जमालुदीन काजी उर्फ जॉनी वाकर बचपन के दिनों से ही अभिनेता बनने का ख्वाब देखा करते थे। पिता मिल के मजदूर थे। मिल बंद हो गया पिता को कम मिलना बंद हो गया। वर्ष 1942 मे उनका पूरा परिवार मुंबई आ गया। मुंबई मे उनके पिता के एक जानने वाले पुलिस इंस्पेक्टर थे जिनकी सिफारिश पर जॉनी वाकर को बस कंडकटर की नौकरी मिल गयी। जॉनी बेहद मजाकिया आवाज और अंदाज में यात्रियों को बस में चढ़ाते थे। उनके इस मजाकिए अंदाज पर यात्री खूब ठहाके लगाते। उन्हीं यात्रियों में एक दिन उन्हें एक ऐसा यात्री मिला जिसने जॉनी का जीवन बदल दिया।  दिग्गज कलाकार बलराज साहनी जॉनी की बस में सफर कर रहे थे। जॉनी के अंदाज से बलराज इस कदर प्रभावित हुए कि तुरंत गुरु दत्त से मिलने को कहा। उस समय गुरु दत्त फिल्म बाजी को लिख रहे थे। दत्त को भी जॉनी काअभिनय पसंद आया। जॉनी फिल्म बाजी का हिस्सा बन गए। इस फिल्म से उन्होंने एक अलग पहचान बनाई।

उनका नाम भी गुरु दत्त ने ही शराब के एक ब्रांड जॉनी वॉकर पर उनका नाम रख दिया। जिस जॉनी का नाम शराब के नाम पर पड़ा उन्होंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया। हंसी का यह बेताज बादशाह 29 जुलाई, 2003 को इस दुनिया को अलविदा कह गया।