10 जनवरी को लगेगा चंद्रग्रहण, पति-पत्नी के लिए ये काम है वर्जित

New Delhi : इस बार नए साल में 6 ग्रहण लगने वाले हैं। पहला ग्रहण 2020 में 10 जनवरी को ही लगेगा। अंतिम ग्रहण 14 दिसंबर को लगेगा। इस नए वर्ष में 4 चंद्रग्रहण और 2 सूर्यग्रहण होंगे। ग्रहण का असर न केवल प्रकृति बल्कि मानव पर भी पड़ता है।

पहला चंद्रग्रहण 10 जनवरी : पहला स्पर्श 10 जनवरी को रात 10:39 बजे से, अंतिम स्पर्श 2:40 बजे। असर 4 घंटे 1 मिनट तक रहेगा। भारत में चंद्रग्रहण दिखाई देगा।

क्या होता है चंद्रग्रहण: जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो सूर्य की पूरी रोशनी चंद्रमा पर नहीं पड़ती है। इसे चंद्रग्रहण कहते हैं। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सरल रेखा में होते हैं तो चंद्रग्रहण की स्थिति होती है। चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात में ही होता है। एक साल में अधिकतम तीन बार पृथ्वी के उपछाया से चंद्रमा गुजरता है, तभी चंद्रग्रहण लगता है। सूर्यग्रहण की तरह ही चंद्रग्रहण भी आंशिक और पूर्ण हो सकता है।

पुराणों की मान्यता के अनुसार राहु चंद्रमा को तथा केतु सूर्य को ग्रसता है। ये दोनों ही छाया की संतान हैं। चंद्रमा और सूर्य की छाया के साथ चलते हैं। चंद्रग्रहण के समय कफ की प्रधानता बढ़ती है और मन की शक्ति क्षीण होती है, जबकि सूर्यग्रहण के समय जठराग्नि, नेत्र व पित्त की शक्ति कमज़ोर पड़ती है। इस दौरान शारीरिक संबंध बनाना वर्जित है।

गर्भवती स्त्री को सूर्य-चंद्र ग्रहण नहीं देखने चाहिए, क्योंकि उसके दुष्प्रभाव से शिशु विकलांग बन सकता है, गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है। इसके लिए गर्भवती के उदर भाग में गोबर और तुलसी का लेप लगाया जाता है, ताकि राहु-केतु उसका स्पर्श न करें। ग्रहण के दौरान गर्भवती को कैंची या चाकू से काटने को मना किया जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते हैं या फिर सिल जाते हैं।