डोकलाम वि’वाद के बाद भारत-चीन ने चीनी सीमा पर कम किया सैन्य बल : रक्षा मंत्रालय

New Delhi : गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। जिसमे कहा गया चीन के साथ डोकलाम वि’वाद को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाने के बाद दोनों देशों ने सीमा पर तैनात अपनी सेना में कमी की है। लेकिन भारत अभी भी क्षेत्र में चीनी गतिविधियों पर करीब से नजर रखे हुए है।

कुछ दिनों पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में बताया था कि राष्ट्र की संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत और चीन की सीमा पर सड़कों, सुरंगों, रेलवे लाइनों और हवाई अड्डों जैसे बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा पर शांति के लिए दोनों देश द्विपक्षीय समझौते का सम्मान करते हैं। भारत और चीन का डोकलाम बॉर्डर हमेशा से दोनों देशों के लिए वि’वादों से घिरा रहा है। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देश बॉर्डर को लेकर संयमित तरीके से काम कर रहे हैं।

डोकलाम में भारत और चीन के स’शस्त्र ब’लों द्वारा पूर्ण संयम दिखाया गया। 2017 में दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच महीनों लंबा गतिरोध चला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वुहान में एक शिखर बैठक की। जहां, यह निर्णय लिया गया कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाई जाएगी”। दोनों देशों की सेनाओं को विशेष मार्गदर्शन दिया गया है ताकि शांति बनी रहे और सीमा का प्रबंधन ठीक तरह से हो सके।

गौरतलब है कि जून 2016 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच त’नाव बढ़ गया था। चीनी सैनिकों ने डोकलाम में सड़क बनाने की कोशिश की थी। भूटान के दावे वाले क्षेत्र डोकलाम में भारतीय से’ना द्वारा चीन के निर्माण कार्य को रोकने की वजह से दोनों सेनाएं एक-दूसरे के आमने-सामने आ गई थीं। भारत-चीन के बीच लंबी सीमा तीन क्षेत्रों में बंटी हुई है। पश्चिमी क्षेत्र लद्दाख और अक्साई चीन के बीच है, मध्य क्षेत्र उत्तराखंड और तिब्बत के बीच है और पूर्वी क्षेत्र तिब्बत को सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से अलग करता है। यह विवाद 73 दिनों तक चला था। इसके बाद चीन ने यहां सड़क निर्माण का काम रोक दिया था।