सैफई मेडिकल कॉलेज मामला : कुलपति ने कहा- सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, कोई रैगिंग नहीं हुई है

New Delhi : इटावा के सैफई मेडिकल विश्वविद्यालय में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग का मामला सामने आने के बाद से विश्वविद्यालय परिसर में हं’गामा मचा हुआ है। मामला प्रशासन तक पहुंच गया है जिसके कारण वाइस चांसलर भी इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं। वाइस चांसलर राज कपूर का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि कोई रैगिंग नहीं हुई है। सभी छात्र स्पष्ट तौर पर रैगिंग से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समिति द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार ‘रैगिंग की घटना आधारहीन है इसमें सभी छात्रों ने हस्ताक्षर किया है।’

सोशल मीडिया पर जब से ये मामला सामने आया है तब से यूजरों का भी यही कहना है कि ये रैंगिंग का मामला है। एक साथ इतने छात्र सिर कैसे मुंडवा सकते हैं। वहीं एक यूजर ने कमेंट किया कि, “भाई अगर रैगिंग नहीं हुआ तो सब क्या शोकिया टकला है गए। और अगर शोकीया टकला हुए तो इन चांसलर महोदय को ये शौक क्यों नहीं हुआ। इनके सर पर तो पूरे बाल है। जो बीमारी स्टूडेंट्स में फैली उससे ये केसे अछूते रह गए।” वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि, गुं’डाग’र्दी तो काम आ गई लेकिन कब तक किसी को ड’राकर खामोश किया जाएगा।”

सपा संरक्षक मुलायम सिंह के गांव सैफई में बने मेडिकल विश्वविद्यालय में एमबीबीएस और एमएस, एमडी, पैरामेडिकल आदि की पढ़ाई होती है। इसमें एक हजार से अधिक छात्र-छात्राएं हैं जिसमें करीब 150 छात्र-छात्राएं एमबीबीएस कर रहे हैं। एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे सभी छात्रों के सिर मुंडवा दिया गया है। हालांकि जब वाइस चांसलर ने छात्रों से इस बारे में पूछा तो किसी ने कोई शिकायत नहीं की।

कुलपति का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के विद्यालयों और महाविद्यालयों में सिर मुंडवाने का चलन है। छात्रों का एक लाइन में चलना अनुशासन है। ऐसा सभी जगह होता है। मैंने खुद सभी छात्रों से पूछा है, लेकिन किसी ने रैगिंग की शिकायत नहीं की। कुलपति ने कहा ”जांच के लिए एक टीम बनाई थी जिसकी रिपोर्ट में भी यही आया कि रैगिंग नहीं की गई है।”