विधायक अपनी पत्नी के साथ रोज 7 घंटे बिताते हैं खेतों में, उप-राष्ट्रपति बोले- ऐसे बनेंगे आत्मनिर्भर

New Delhi : आज जब एक मुखिया और सरपंच भी कुर्सी पर बैठते ही बड़ी बड़ी गाड़ियों का मालिक बन जाता है। ऐसे में ओडिशा के एक विधायक मनोहर रणधारी ने मिसाल पेश की है। वे कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच अपने खेतों में काम करने के लिये टूट पड़े हैं। खेत में वे धन-रोपणी कर रहे हैं जिसमें उनकी मदद उनकी पत्नी भी करती हैं। वैसे वे ओडिशा में सबसे जमीनी नेताओं में शुमार किये जाते हैं लेकिन उनकी खेती-किसानी की लगन और स्किल देखकर उनकी तारीफ उपराष्ट्रपति वेकैया नायडू ने की तो वे एकाएक लाइम लाइट में आ गये हैं।

मनोहर रणधीर बीजू जनता दल के हैं और अपने खेत की स्वयं ही जुताई करते हैं। श्रमिकों के साथ धान की रोपाई करते हैं। नवरंगपुर जिले के डाबूगांव निर्वाचन क्षेत्र के तीन बार के विधायक अपने 25 एकड़ खेत पर रोज सात घंटे गुजार रहे हैं। वह अपनी पत्नी के साथ सुबह पांच बजे ही अपने खेत पर काम करने लगते हैं। उनकी पत्नी सरकारी कर्मचारी हैं और दस बजे कार्यालय चली जाती हैं। विधायक पूर्वाह्न तक अपने खेत में काम करते रहते हैं। खेती-बाड़ी के प्रति रणधारी समर्पण की उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने खूब प्रशंसा की है।

रणधारी ने न्यूज एजेंसी से कहा- विधायक बनने से पहले से ही मैं खेती कर रहा हूं। मेरे पिताजी पिछले साल गुजर गये, इसलिये मैं इस बार सक्रिय हूं। वैसे मैं सामाजिक सेवा के लिये नेता के रूप में काम करता हूं लेकिन खेती-बाड़ी मेरा पेशा और आय का स्रोत है। नवरंगपुर जिले के अपने माझीगुडा गांव में मैं हर साल दो महीने खेती-बाड़ी का काम करता हूं। केवल खेती-बाड़ी ही कोविड-19 महामारी के दौरान पेट भर सकती हैं। उन्होंने युवाओं से खेती पर ध्यान देने की अपील की।

उनका कहना है कि वह धान और मक्के की खेती से हर साल सात लाख रूपये कमा लेते हैं। रणधारी ने कहा- मैं चाहता हूं कि सरकारी कर्मी से लेकर व्यापारियों तक सभी को कुछ समय खेती में लगाना चाहिये ताकि हम गरीबी हटा पायें और आत्मनिर्भर बनें। उनको लेकर उपराष्ट्रपति नायडू ने ट्वीट किया- विधायक मनोहर रणधारी साल में दो महीने खेत में काम करते हैं। वह कहते हैं कि युवाओं को खेतीबारी करने से नहीं हिचकना चाहिये।

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