मजदूर पति ने अपनी पत्नी को पढ़ा लिखाकर बनाया पुलिस अधिकारी- सलाम है ऐसे पति को

New Delhi : प्रतिभा की कोई परिभाषा नहीं होती और न ही प्रतिभा को बांधने का कोई बंधन होता है। इस बात को प्रमाणित कर दिया है पद्मशीला ने। महाराष्ट्र के भंडारा जिले की पद्मशीला तिरपुडे ने अपने संघर्ष के दिनों में हार नहीं मानी और सारी महिलाओं के लिए प्रेरणा साबित हुई। पद्मशीला ने मज़दूरी कर पत्थर के सिलबट्टे बनाकर बेचने के साथ-साथ पढ़ाई भी जारी रखी और एक दिन ये मेहनत रंग लाई। एमपीएसी महाराष्ट्र पुलिस की परीक्षाएं और टेस्ट में सफलता हासिल करने के बाद आज पद्मशीला पुलिस उपनिरीक्षक हैं।

कुछ दिन पहले पद्मशीला तिरपुडे को कोई भी नहीं जानता था लेकिन इन दिनों उसे जानने के लिए सभी उत्साही है। दस साल पहले भंडारा जिले के वाकेश्वर के पास के ही गांव के तुकाराम खोब्रागडे से प्रेम विवाह करने वाली पद्मशीला बताती हैं की शुरुआती दिनों में दोनों पति पत्नी मजदूरी करके जीवन यापन कर रहे थे जितना कमाते उतना दिन भर के जीवन यापन के लिये पर्याप्त था।
महाराष्ट्र के छोटे से जिले से आने वाली पद्मशीला ने प्रेम विवाह किया था। उनकी शादी पास के ही गांव में रहने वाले तुकाराम खोब्रागडे से हुई थी। पद्मशीला बताती हैं कि उन्होंने शुरूआती दिनों में मजदूरी कर के अपना पेट पाला है। एक बार ऐसा हुआ जब उसके पति को मजदूरी में मिले 50 रूपए कहीं खो गये। उस दिन पद्मशीला भी काम पर नहीं गयी थीं। उस दिन दोनों ने जिस हालात में अपना दिन काटा उसने उनकी जिंदगी बदल दी। उस दिन को दोनों ने बिना पैसों के बहुत मुश्किलों से गुजारा। पूरी रात वह यही सोचते रहे कि अगर ऐसा ही रहा तो आगे की जिंदगी कैसे कटेगी। इसी कशमकश में दोनों ने पूरी रात निकाल दी।

फिर पति ने ये तय किया की कुछ भी हो वो अपनी पत्नी की आगे की पढ़ाई जारी रखेंगे। इस बीच सिलबट्टे और फल बेचते पद्मशीला ने स्नातक पूरा किया और एमपीएसी का एग्जाम क्लियर करने के बाद आज पुलिस उपनिरीक्षक हैं। पद्मशीला आज उन सभी महिलाओ के लिए प्रेरणा है जो थोड़ी सी विपरीत परिस्थिति में हार माना लेती हैं।

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