सरकारों को न्यायपालिका के कामों में हस्तक्षेप करके अपना व्यवसाय नहीं करना चाहिए :कानून मंत्री

New Delhi : कल 15 अगस्त के मौके पर पूरे देश में धूमधाम से स्वतंत्रता दिवस मनाया गया जिसमें सभी ने अपने -अपने स्थान पर झंडा फहराया। वहीं सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के झंडा फहराने के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपने विचार व्यक्त किए। इसी दौरान कानून मंत्री ने सु्प्रीम कोर्ट के लॉन में कहा कि ”जहां तक ​​सरकार की बात है, हमारा काम इंफ्रास्ट्रक्चर देना है। केंद्र या राज्य सरकार को न्यायालय के किसी भी काम में हस्तक्षेप करके व्यवसाय नहीं चलाना चाहिए। यह पूरी तरह से न्यायपालिका के अधिकारक्षेत्र में आता है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि जब हम सर्वोच्च न्यायालय के बोझ के बारे में बात करते हैं तो मेरे मन में एक गंभीर प्रश्न उठता है। यह विचार हमें उसके गुणों से अवगत कराता है। लेकिन कानून मंत्री का दृष्टिकोंण बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि कुछ हाईकोर्ट द्वारा कुछ फैसले ऐसे दिए गए थे जो मनमाने थे। उनका क्या किया जाना चाहिए? कानून मंत्री ने आगे कहा कि, मैं एक नया चलन देख रहा हूं। कुछ न्यायाधीश, अपनी सेवानिवृत्ति के 2 दिन पहले, सं’दिग्ध कानूनी वैधता का निर्णय देते हैं और इसे सही ठहराने के लिए तीन दिनों के लिए टेलीविजन पर बैठते हैं। मुझे नहीं लगता कि यह उचित है।

बता दें कि रविशंकर प्रसाद ने ये बातें मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के झंडा फहराने के बाद कही। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय समेत सभी हाईकोर्ट में अनुशासन, न्यायिक प्रक्रिया और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वहीं कुछ हाईकोर्ट की आलोचना भी की।मामलों के जल्दी निस्तारण के लिए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट का स्थापित होना चाहिए। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि 1980 की फौजदारी और दीवानी अपीलें अभी भी हाईकोर्ट में लंबित पड़ी हैं।

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