श्रीराम मंदिर निर्माण में हर तीर्थस्थल की 50 ग्राम मिट‍्टी और सभी नदियों का जल शामिल होगा

New Delhi : पांच अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर का विधिवत भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके लिये समय भी निश्चित हो गया है। कहा जा रहा है कि भूमि पूजन करने का जो मुहूर्त बेहद कम देर का है और उसी दरम्यान प्रधानमंत्री चांदी की शिलाओं का पूजन करेंगे और ताम्र कलश स्थापित करेंगे। बहरहाल मंदिर निर्माण से जुड़े कुछ रोचक तथ्य और जानकारियां भी निकलकर सामने आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी अयोध्या पहुंचेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट हर हाल में प्रधानमंत्री मोदी से ही भूमि पूजन चाहता है।

भूमि पूजन समारोह काशी और अयोध्या के आचार्य सम्पन्न करायेंगे। भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी ही मंदिर की आधारशिला भी रखेंगे। अयोध्या के साधु-संत और आम लोग इस दिन का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मंदिर निर्माण के लिये हर तीर्थ स्थलों से 50 ग्राम मिट्टी और प्रत्येक नदी से अधिकतम 100 ग्राम जल अयोध्या लाने की योजना है। इसके लिये अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित तीर्थों और नदियों के साथ उस इलाके के क्रांतिकारियों तथा संतों की सूची तैयार की जा रही है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुताबिक बारिश के बाद जब हालात सामान्य होंगे, तो मंदिर निर्माण के कार्य और गतिविधियों में तेजी आयेगी। करीब तीन से साढ़े तीन साल में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जायेगा।

मंदिर निर्माण में कोरोना को लेकर व्यापक एहतियात बरता जायेगा। मंदिर निर्माण के दौरान विभिन्न स्थानों से अलग-अलग दिन में बेहद कम संख्या में स्वयंसेवक मिट्टी और जल लेकर अयोध्या पहुंचायेंगे। वैसे तो भूमि पूजन पांच अगस्त को होगी लेकिन इसकी तैयारियां 3 अगस्त रक्षाबंधन से ही शुरू हो जायेंगी। रक्षा बंधन के दिन गणेश पूजा होगी। चार अगस्त को रामार्चन पूजा होगी, जिसमें भगवान राम और सभी देवताओं की पूजा की जायेगी। 5 अगस्त को भूमि पूजन और मन्दिर की आधारशिला रखी जायेगी। बताया जा रहा है कि 12.15 मिनट पर 32 सेकेंड का भूमि पूजन का शुभ मुहूर्त है। चांदी की शिलाओं की पूजा होगी।

श्रीराम मंदिर की आधारशिला पूजा में पीएम मोदी ताम्र कलश स्थापित करेंगे। इस ताम्र कलश में गंगा जल के साथ सभी तीर्थों के जल, सर्वऔषधि और पंच रत्न रखे जायेंगे। इसके साथ ही पाताल लोक के राजा शेषनाग और शेषावतार की प्रसन्नता के लिये चांदी के नाग-नागिन, भूमि के आधार देव भगवान विष्णु के कच्छप अवतार के प्रतीक कछुआ भी नींव में स्थापित होंगे।

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