हरिद्वार जाएं तो इन मंदिरों के दर्शन करना ना भूलें, हर साल आते हैं करोड़ों श्रद्धालु

New Delhi: हरिद्वार (Haridwar) उत्तराखंड का प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां देश विदेश से लोग मां गंगा की पावन जलधारा में डुबकी लगाकर कर्मफल से मुक्ति के लिए आते हैं। यहां का सबसे पवित्र घाट हर की पैड़ी जहां पहली बार पर्वत से उतर कर गंगा की जलधारा मैदानी इलाकों में पहुंचती है।

पौराणिक कथा है कि यहीं पर दक्ष प्रजापति नें यज्ञ का आयोजन किया था। पर्यटन के लिए लिहाज से भी हरिद्वार लोगों को काफी पसंद आता है। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि यहां ऐसे प्राचीन मंदिर हैं जिनका संबंध पुराण की कथाओं से। अबकी बार आप हरिद्वार (Haridwar) आएं तो इन मंदिरों के दर्शन करना ना भूलें, कहते हैं इन मंदिरों में दर्शन से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

दक्ष महादेव मंदिर

दक्ष महादेव मंदिर हरिद्वार का प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर को दक्ष प्रजापति मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के बीच में भगवान शिवजी की मूर्ति लैंगिक रूप में विराजित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के पांव के निशान बने हैं, जिन्हें देखने के लिए मंदिर में हमेशा श्रद्धालुओ का तांता लगा रहता है। इस मंदिर में एक छोटा सा गड्ढा है, जिसके बारे में बताया जाता है कि इसी गड्ढे में देवी सती ने अपने जीवन का बलिदान दिया था।

मनसा देवी मंदिर

मनसा देवी का मंदिर हर की पैड़ी से ज्यादा दूर नहीं है। मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है। इनका जन्म संत कश्यप के मस्तिष्क से हुआ था इसलिए इन्हें मनसा देवी कहा जाता है। उन्हें नाग राजा वासुकी की पत्नी भी माना जाता है। मनसा देवी मंदिर शिवालिक पहाड़ियों पर स्थित है।

मायादेवी मंदिर

मायादेवी का मंदिर शक्तिपीठ सती के शिव के प्रति प्रेम का भी गवाह है। बताया जाता है कि यहां माता सती की नाभी गिरी थी। माता माया देवी मंदिर के साथ ही भैरव बाबा का मंदिर भी है। मान्यता है कि मां की पूजा के बाद जब तक भक्त भैरव बाबा का दर्शन पूजन नहीं कर लेते उनकी पूजा पूरी नहीं होती।

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चंडी देवी मंदिर

हिमालय की दक्षिण पर्वत माला के नील पर्वत के ऊपर स्थित है चंडी माता का मंदिर। इस मंदिर की मुख्य मूर्ति की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचर्य ने की थी। जबकि मंदिर का निर्माण राजा सुचात सिंह ने 1929 में कराया था। कथाओं ने के अनुसार, चंडी देवी ने शुंभ-निशुंभ के सेनापति ‘चंड’ और ‘मुंड’ को यहीं मा’रा था।

गौरी-शंकर महादेव मंदिर

गौरी-शंकर महादेव का मंदिर हरिद्वार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर चंडी देवी मंदिर के पास ही है। इस मंदिर का वर्णन शिवपुराण में किया गया है। कथाओं के अनुसार, भगवान शिव दक्ष प्रजापति मंदिर में माता सती से विवाह करने के बाद यहां पहुंचे थे। तभी से मंदिर का नाम गौरी शंकर महादेव पड़ा। बताया जाता है जो भी भक्त यहां पर आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बिल्केश्वर महादेव मंदिर

बिल्केश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर स्थित है। कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने देव ऋषि‍ नारद की सलाह पर बेलपत्रों से घिरे इस पर्वत पर कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पाया था। हरिद्वार में शिव को एक बार नहीं दो-दो बार अपनी अर्द्धांगिनी मिलीं। एक माता सती और दूसरी माता पार्वती। यहां बिल्वकेश्वर महादेव शेषनाग के नीचे लिंग रूप में विराजते हैं। कहते हैं भोलेनाथ यहां भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं।

गौरी कुंड

बताया जाता है कि जब माता पार्वती तपस्या कर रही थीं तो वह बेलपत्र खाकर अपनी भूख शांत किया करती थीं, लेकिन पीने के लिए कुछ नहीं था। तब ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से गंगा की जलधारा प्रकट की। जहां यह गंगा गिरी वह गौरी कुंड के नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि तपस्या के दौरान माता पार्वती इसी स्थान पर स्नान और पानी पिया करती थीं।