अध्यात्म का प्रथम चरण है ‘मन की समता’

New Delhi: ओंकार स्वरूप परब्रह्म परमात्मा, जो जगत में और मेरे भीतर भी व्याप्त है, उसके साथ जुड़ने के लिए आवश्यकता है इस मन रूपी दीवार को पार करने की। …

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Pravachan

जहां प्यार होता है, वहां परमात्मा की मौजूद रहते हैं

New Delhi: मनुष्य रूप में जन्म लेकर यदि तुम्हारे वश का कुछ नहीं है तो प्रेम का रास्ता अपना सकते हो। क्योंकि प्रेम से ही ध्यान, योग, साधना इत्यादि संभव …

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