कश्मीर में धारा 144 हटाने से SC का इंकार, कहा-यह संवेदनशील मामला है,सरकार को वक्त मिलना चाहिए

New Delhi : जम्मू-कश्मीर मा’मले में कें’द्र सरकार की जी’त हुई है। क्योंकि जम्मू-कश्मीर में धा’रा 144 ह’टाने की या’चिका पर सु’नवाई से सुप्री’म को’र्ट ने इ’नकार कर दिया है। सुप्री’म को’र्ट ने कहा कि मा’मला सं’वेदनशी’ल है। इसमें सरकार को व’क्त मिलना चाहिए। सु’प्रीम को’र्ट ने पू’छा कि क्या आप स्थि’ति की स’मीक्षा कर रहे हैं ? इस पर अ’टॉर्नी ज’नरल ने कहा कि हम रोज स’मीक्षा कर रहे हैं। सु’धार आ रहा है। उम्मीद है कि कुछ दिनों में हा’लात सा’मान्य हो जाएंगे। या’चिकाक’र्ता की व’कील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मू’लभू’त सु’विधाओं को ब’हाल किया जाना चाहिए। कम से कम अ’स्पतालों में सं’चार सेवा को ब’हाल किया जाना चाहिए। इस पर अ’टॉर्नी ज’नरल ने कहा कि स्थि’ति सं’वेदनशी’ल है। हम मू’लभूत सु’विधाओं को ब’हाल करने पर काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धा’रा 370 ह’टाने के बाद वहां के कुछ सं’वेदनशी’ल इ’लाकों में इं’टरनेट और मोबाइल से’वा को बं’द कर दिया गया है। इसके साथ ही धा’रा 144 भी लगा दी गई है। जिसके का’रण बाहर में रहकर पढ़ने वाले कश्मीरी छात्र प’रेशान हैं। जिसके चलते लॉ के एक छात्र ने सु’प्रीम को’र्ट से गु’हार लगाई है कि कश्मीर में उसके माता-पिता के बारे में जा’नकारी मु’हैया क’रवाई जाए। जामिया मिलिया इस्लामिया से का’नून में ग्रे’जुएट मोहम्मद अलीम ने को’र्ट में या’चिका दा’यर कर कहा है कि 4 अगस्त से उसे कश्मीर के अनंतना’ग में रह रहे अपने माता-पिता और भाई के बारे में कोई जा’नकारी नहीं मिली है।

अलीम ने को’र्ट से कहा है कि जम्मू कश्मीर से अ’नुच्छे’द 370 ह’टाने का प्र’स्ताव संसद में लाए जाने के बाद से ही घा’टी और जम्मू लद्दाख में इं’टरनेट ने’टवर्क ख’त्म है। क’र्फ्यू जैसे हा’लात बने हुए हैं। टे’लीफोन, इं’टरनेट और सोशल मीडिया स’मेत सं’पर्क के सभी इं’तजाम बं’द पड़े हैं।