2018 में सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों ने बाटोरी सुर्खियां, जाने किन कानूनों में हुआ बदलाव

 

New Delhi: साल 2018 खत्म होने वाला है। इससे पहले की हम नये साल का स्वागत करें वक्त है उन खबरों को जानने का जिसने इस साल खूब सुर्खिया बटोरी। यह साल भारत में कानूनों में बदलाव के लिहाज से काफी अहम रहा। देश की सर्वोच्च न्यायालय  ने कई ऐसे कानूनों को असंवैधानिक करार दिया। जो से भारत को बाकी देशों के मुकाबले काफी पीछे कर रहा था। इस साल चार ऐसे बड़े फैसले हुए जो भारत में रह रही आम जनता की जिंदगी को बदलने वाले हैं।

धारा 497 को किया खत्म

सुप्रीम कोर्ट ने 150 साल पुराने एडल्ट्री कानून को असंवैधानिक करार देते हुए इसे खत्म कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि एडल्ट्री अपराध नहीं लेकिन इसके यह तलाक का अधिकार हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि महिलाओं को परूषों की प्रॉपर्टी की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। दरअसल धारा 497 में सिर्फ पुरुषों के लिए सजा का प्रावधान है जबकि महिला को इसमें पीड़िता माना जात है। लंबे वक्त से इस कानून को खत्म करने की मांग की जा रही थी।

महिलाओं के प्रवेश को मिली मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने जो दूसरा सबसे बड़ा फैसला लिया वो था सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश। कोर्ट ने इसी साल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हर उम्र की महिलाओं के लिए मंदिर के द्वारा खोल दिये। सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अभी तक मंदिर मे 10-50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित था।

लाइव स्ट्रीमिंग की मिली इजाजत

26 सितंबर को देश की सर्वोच्च न्यायालय एक और बड़ा फैसला किया वो था अदालती कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग। कोर्ट ने अदालती कारवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की इजाजत दे दी। हालांकि अभी ये प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट से ही शुरू होगी।  बाद में बाकी अदालतों में इसे शुरु किया जाएगा।

एलजीबीटी कम्यूनीटि को राहत

यह साल एलजीबीटी के कम्यूनीटि के लोगों के लिए काफी अच्छा रहा। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट ने समलैंगिक यौन संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया। कोर्ट ने धारा 377 को अतार्किक और मनमानी बताते हुए कहा कि एलजीबीटी समुदाय को भी समान अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह का भेदभाव मौलिक अधिकारों का हनन है।

 

 

 

 

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