अमेरिकी संसद में सुनंदा वशिष्ठ ने कहा-कश्मीर के बिना भारत नहीं और भारत के बिना कश्मीर नहीं

New Delhi : अमेरिकी संसद में गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के मानवाधिकार हालात पर सुनवाई हुई। जिसमें स्तंभकार (कॉलमनिस्ट) सुनंदा वशिष्ठ ने भारत का पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि कश्मीर तब से इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे आ’तंक और क्रूरता का सामना कर रहा है जब पश्चिमी देशों को आ’तंक के बारे में मालूम नहीं था। उन्होंने बताया कि भारत की लोकतांत्रित साख काफी ऊंची है। हमने पंजाब और पूर्वोत्तर राज्यों में आ’तंक को हराया है।

वशिष्ठ ने गुरुवार को वाशिंगटन में टॉम लैंटोस एचआर कमीशन द्वारा आयोजित मानवाधिकार पर कांग्रेस की सुनवाई में कहा, ‘हमने आईएस के स्तर वाला डर और क्रू’रता 30 साल पहले देखी है तब पश्चिम को आ’तंकवादी संगठन आईएस की क्रू’रता के बारे में पता तक नहीं था। मुझे खुशी है कि ये सुनवाई आज यहां हो रही है क्योंकि मेरे परिवार और मेरे जैसे हर व्यक्ति ने अपने घरों, हमारी आजीविका को खो दिया है। तब दुनिया ने उसपर चुप्पी साधी हुई थी।’

वशिष्ठ ने सुनवाई कर रहे दल के सदस्यों से पूछा, ‘उस समय मानवाधिकार के वकील कहां थे जब मेरे अधिकार छीने गए? वह 19 जनवरी, 1990 की रात को कहां थे। जब कश्मीर में आवाजें लगाई जा रही थीं कि वे कश्मीर में हिंदू महिला चाहते हैं लेकिन हिंदू पुरुषों को नहीं? मानवता के उद्धारक उस समय कहां थे जब मेरी मां और मुझे मा’रने के लिए मेरे कमजोर बूढ़े दादाजी रसोई के चाकू और एक पुरानी जंग लगी कुल्हाड़ी के साथ खड़े थे ताकि हमें उस बदतर परिस्थिति से बचा सकें जो हमारा इंतजार कर रही थी?’

उन्होंने कहा, ‘हमारे लोगों को आ’तंकियों ने तीन विकल्प दिए थे- भाग जाओ, धर्मांतरण कर लो या फिर उसी दिन उन्हें मौ’त के घाट उतार दिया जाएगा। लगभग 400,000 कश्मीरी हिंदू उस ड’रावनी रात को घाटी से भा’गने पर मजबूर हो गए थे। जिन्हें नहीं मा’रा गया वह जिंदा रहे। आज 30 साल बाद भी कश्मीर स्थित मेरे घर में मेरा स्वागत नहीं किया जाता।’

वशिष्ठ ने कहा, ‘मुझे घाटी में मेरे धर्म का पालन करने की इजाजत नहीं है। कश्मीर स्थित मेरे घर पर किसी और ने अवैध कब्जा कर लिया है। यही हाल मेरे समुदाय के अन्य लोगों के साथ हुआ। जो लोग घर छोड़कर नहीं गए उन्हें या तो मा’र दिया गया या लू’ट लिया गया। भारत ने कश्मीर पर कभी कब्जा नहीं किया। यह भारत का ही अंग था और रहेगा। कश्मीर के बिना भारत नहीं और भारत के बिना कश्मीर नहीं।’