भारत ने टैंक गाइडेड मिसाइल का किया सफल परीक्षण, दुश्मनों के टैंकों को पल भर में करेगा ध्वस्त

New Delhi : भारत ने आज आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में फायरिंग रेंज से मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल प्रणाली का तीसरा सफल परीक्षण फायरिंग है जिसे भारतीय सेना की तीसरी पीढ़ी के एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की आवश्यकता के लिए विकसित किया गया है।

बता दें कि पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम का इससे पहले परिक्षण सितम्बर में 2018 में किया गया था। इस मिसाइल की खसियत है कि इसे कंधे पर रखकर चलाई जा सकती है। कंधे पर रखकर चलाए जा सकने वाले इस मिसाइल की रेंज क्षमता 4 किलोमीटर तक हो सकती है।

कहा जा रहा है कि यह मिसाइल भारत की ‘नाग’ मिसाइल सीरीज का हिस्सा है।आसानी से ले जा सकने वाले इस मिसाइल से टैंक को ध्वस्त किया जा सकता है। दुर्गम जगहों पर भी दुश्मनों के टैंक और अन्य ठिकानों को उड़ाने में सेना को मिलेगी मदद।

इससे पहले आज भारतीय वासुसेना को स्वदेश में निर्मित ’नेत्र’ एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट मिला। वायुसेना को यह दुसरा नेत्र एयरक्राफ्ट मिला है। पंजाब में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख एयर मार्शल आर नांबियार के उपस्थिति में नेत्र एयरक्राफ्ट को सौंपा।

आपको बता दें कि बालाकोट में आतंकियों को नींद में ही मौत के आगोश में सुला देने के इस प्रक्रिया में ‘नेत्र’ ने अहम भूमिका आदा की थी। नेत्र ने भारतीय वायुसेना के विमान मिराज को निर्देशित किया। जिसके कारण मिराज पाकिस्तान की सीमा में 80 किलोमीटर घुसकर उन्हें सबक सिखाने में कामयाब रहा।

नेत्र, स्वदेश में विकसित एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम है. जिसे एयरो इंडिया 2017 में वायुसेना में शामिल किया गया था. नेत्र दुश्मन की मिसाइल और विमान को जमीन, समुद्र और आकाश में सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में ढूंढ निकालने में सक्षम है। सुबह 3.30 बजे जब मिराज पाकिस्तानी आतंकियों के कैंपों को नेस्तेनाबूद कर रहा था तो उस वक्त नेत्र, गैर सैन्य पूर्व खाली इलाकों में रडार कवरेज मुहैया करा रहा था।