तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हें आजादी दूंगा,समेत सुभाष चंद्र बोस के ये 10 नारे आप में भर देंगे जोश

New Delhi: नेताजी के नाम से मशहूर भारत के वीर सपूत सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जववरी 1987 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। देश में नेता जी के जन्मदिन की जोरों शोरों से तैयारियां की जा रही हैं।

सुभाष चंद्र बोस का नाम भारत की आजादी में बहुत ही महत्वपूर्ण है। जितना महत्वपूर्ण उनका नाम है उतना ही महत्वपूर्ण उनका योगदान रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के अहिंसावादी विचारों से ज्यादा सहमत नहीं थे। सुभाष चंद्र बोस ‘नेताजी’ के नाम से मशहूर थे। नेता के नाम जैसा ही उनका काम था। वो नेता थे। अपने स्वभाव के कारण ही उन्होंने अपने दम पर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के लिए एक पूरी सेना बना दी।

सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार की स्थापना की और आजाद हिंद फौज का गठन किया। 4 जुलाई 1944 को उन्होंने बर्मा में अपना प्रसिद्ध नारा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ दिया। लेकिन सुभाष चंद्र बोस का यही नारा मशहूर नहीं है। उनकी कई और विचार हैं जो मशहूर हुए। आज हम आपको बता रहे हैं सुभाष चंद्र बोस के 10 प्रसिद्ध नारों के बारे में-

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा

याद रखिए दुनिया में सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है।

ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिले, हमारे अंदर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।

एक सैनिक के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों को संजोना और उन पर जीना होगा। पहला सच्चाई, कर्तव्य और बलिदान। जो सिपाही हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है, जो हमेशा अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहता है, वो अजेय है। अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने ह्रदय में भर लो।

Subhash Chandra Bose

सफलता, हमेशा असफलता के स्‍तंभ पर खड़ी होती है।

मेरा अनुभव है कि हमेशा आशा की कोई न कोई किरण आती है, जो हमें जीवन से दूर भटकने नहीं देती।

जिस व्यक्ति के अंदर ‘सनक’ नहीं होती वो कभी महान नहीं बन सकता। लेकिन उसके अंदर, इसके आलावा भी कुछ और होना चाहिए।

जो अपनी ताकत पर भरोसा करते हैं, वो आगे बढ़ते हैं और उधार की ताकत वाले घायल हो जाते हैं।

हमारा सफर कितना ही भयानक, कष्टदायी और बदतर हो, लेकिन हमें आगे बढ़ते रहना ही है। सफलता का दिन दूर हो सकता है, लेकिन उसका आना निश्चित ही है।

मां का प्यार सबसे गहरा होता है- स्वार्थरहित। इसको किसी भी तरह से मापा नहीं जा सकता।