सरकारी स्कूल से पढ़ा, पहले प्रयास में हिंदी मीडियम से टॉप रैंक पाकर अफसर बना किसान का बेटा

New Delhi : 2018 की UPPCS यानी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा का परिणाम बीते हफ्ते घोषित किया गया। इस परीक्षा में इस बार हिंदी मीडियम के छात्र गोपाल शर्मा ने बड़ी सफलता हासिल की है। हिंदी मीडियम से उन्होंने परीक्षा में पहली रैंक पाई है। वहीं ओवरऑल उनकी रेंक 15 है। उनकी ये कहानी दो वजहों से खास है एक तो वो हिंदी मीडियम से हैं, दूसरा उन्होंने ये परीक्षा और इतनी अच्छी रेंक पहले प्रयास में हासिल की है। इसके साथ ही वो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखते हैं। अब वो ट्रेनिंग पूरी कर एसडीएम के पद पर नियुक्त किये जाएंगे। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी मेहनत के साथ ही उनकी स्ट्रेटजी भी है जिसे आज आपको भी जानना चाहिए।

गोपाल अलीगढ़ के रहने वाले हैं यहीं से ही उन्होंने अपनी प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च स्तर तक की पढ़ाई की। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं रही। उनके पिता किसान हैं। वो गांव के ही सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़े। उन्हें सिविल सेवा में आने की प्रेरणा एक बच्चे से मिली जो कि एक चाय की दुकान पर काम करता था। इस समय वो 7वीं कक्षा में थे। टी स्टॉल का मालिक उस बच्चे से काम भी कराता और उसे मारता भी था। गोपाल स्कूल जाते वक्त रोज ऐसा होता देखते थे। एक दिन उन्होंने दुकान के मालिक से कहा कि तुम इसे क्यों मारते हो तुम्हें इसे स्कूल में भेजना चाहिए। इस पर दुकान मालिक ने कहा कि तुम पहले खुद तो पढ़ लिख कर कलेक्टर बन जाओ बाद में इसे पढ़ने को कहना। ये बात गोपाल के दिमाग में बैठ गई तब से उसने कलेक्टर बनने के लिए क्या करना होता है इस बारे में जानकारी निकालना शुरू कर दिया।
10वीं तक आते-आते गोपाल को परीक्षा के विषय में पूरी जानकारी हो गई थी। लक्ष्य तय था कि सिविल सेवा में ही जाना है। लेकिन ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद जब वो इस परीक्षा में बैठने के लिए योग्य हुए तो उनके सामने एक बड़ी समस्या आ गई। ये समस्या थी पैसों की घर में इतने पैसे नहीं थे कि लड़के को दिल्ली या प्रयागराज जैसी मंहगी कोचिंग के लिए भेज सकें। लेकिन गोपाल की किस्मत ने उनका साथ दिया। उन्हें पता चला कि उनके ही जिले के एसडीएम पंकज वर्मा गरीब छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग संस्थान चलाते हैं।

उन्होंने इस बारे में जानकारी जुटाई और उनकी एकेडमी में एडमिशन पाने पहुंच गए। यहां फ्री में उन्हें ऐसी कोचिंग मिली कि उन्हे पूरे उत्तर प्रदेश में हिंदी माध्यम का टॉपर बना दिया। उन्होंने इस सफलता को मात्र 10 महीने की तैयारी कर हासिल किया। उनका कहना है कि वो कोचिंग से लेकर सेल्फ सटडी तक दिन में 10 से 12 घंटे पढ़ते थे।

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