वे गो’लियां चलाते रहे हम तिरंगा लहराते रहे,जोश से भर देगी इन जवानों की कहानी,ऐसे पूरा किया वादा

New Delhi:  वादा छोटा-बड़ा नहीं होता। वादा तो बस वादा होता है..। चाहे वह मोहब्बत में प्रेमिका से किया गया हो या फिर मां, पिता, भाई, बहन, दोस्त या फिर देश से…। हम वादे अपनी जिंदगी में खुद से भी करते हैं और दूसरों से भी। वादा पूरा होने की जो खुशी होती है वह  जिंदगी भर रहती है। आज प्रॉमिस डे है। इस खास मौके पर जानिए जांबाजों के बारे में जिन्होंने आन-बान और शान के लिए देश के लिए कुछ कर गुजरने का वादा किया।

प्रॉमिस डेर पर कैप्टन डीके सिंह ने कहा कि- भारत-पाक सीमा स्थित जम्मू के राजपुरा में दो ऐसी पोस्ट थीं, जहां बीते दो साल से तिरंगा नहीं लहराया था। साल 1999 में जनवरी की ठंड थी। हमने ठान लिया था कि उन दोनों पोस्ट पर हर हाल में तिरंगा लहराएंगे। हमने आड़ लेने के लिए खाई खोदी और मुहिम में लग गए। दुश्मनों के रेंज में आते ही गो’लियां चलने लगती थीं। हमने मिशन पूरा किया और तिरंगा लहरा दिया। इस बीच हमारा हौसला बढ़ा रहे थे वहां के गुर्जर और मुस्लिम नागरिक। हम उनसे आटा मांगते तो वे जिद पर आ जाते और बना कर ही खाना लाते थे। वहां की प्रसिद्ध पलंग तोड़ मिठाई भी हमारी यादों में मिठास घोलती है।

अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक,  मेजर आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि-  संसद पर आ’तंकी हमले का गुस्सा हर देशवासी को था। पूरा देश एकजुट था। हर जगह लोग इसकी चर्चा कर रहे थे। उसी दौरान सेना की एक टुकड़ी ट्रेन से शिफ्ट हो रही थी। उत्तर प्रदेश के किसी स्टेशन पर ट्रेन रुकी थी। ट्रेन रुकने के कुछ ही देर बाद लोग वहां एकजुट होने लगे। वे सैनिकों और अधिकारियों से कभी खाना तो कभी पानी पूछते। उनका कहना था कि उन्हें सेवा का मौका दें। काफी देर तक गांव वाले खड़े रहे। पूरी भीड़ लग गई। मेरे पास भी कुछ गांव के लोग आए, उन्होंने कहा- सर, संसद पर ह’मला करने वालों को छोड़ना मत। उन्होंने वादा लिया कि बदला जरूर लेना। हमें देशवासियों का प्यार चाहिए था और वह प्यार हमें खूब मिला। वो माहौल काफी भावुक करने वाला था। मैं कभी भूल नहीं सकता।