बेटे को पढ़ाने के लिए मां ने एक साथ की तीन नौकरियां..आज करोड़पति है उस मां का बेटा

New Delhi : ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ फिल्म तो आपने देखी ही होगी। जिसमें दिखाया था कि कैसे एक झुग्गी- झोपड़ी में रहना वाला मिलेनियर बनता है। ‘Food King’ के CEO सरथ बाबू की कहानी उससे कम नहीं है। किसी जमाने में चेन्नई की झुग्गी में रहने वाले सरथ आज करोड़ों की कंपनी के मालिक हैं। उन्होंने ये कामयाबी अपनी मां की मेहनत और अपनी लगन से पाई है।

सरथ बाबू ‘Food King’ के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे एक दिन एक ऐसी कंपनी खड़ी कर देंगे, जो उन्हें कामयाबी के शिखर पर पहुंचा देगी। चेन्नई के मडिपक्कम इलाके की झुग्गी बस्ती में जन्मे सरथ 5 भाई-बहनों में एक हैं। इन पांचों का पालन-पोषण अकेली मां ही करती थी। सरथ ने अपनी मां को दिन-रात मेहनत करते देखा है। मां सुबह इडली बेचने का काम करती थी और दोपहर में स्कूलों में खाना सप्लाई करती थीं।

मेहनत करने के बाद भी वे इतना नहीं कमा पाती थीं कि बच्चों की परवरिश ठीक से कर सकें। मां चाहती थी कि उसके सभी बच्चे पढ़कर लिखकर बड़े आदमी बने। इन विपरीत परिस्थितियों में भी सरथ ने कभी हार नहीं मानी और उसने सोच लिया था कि वह बड़ा होकर कुछ न कुछ बड़ा काम करेगा।

सरथ मां को मेहनत करते देखते थे। उन्होंने सोचा कि मां की मदद की जाए। वे भी मां के साथ सुबह जल्दी उठते और इडली बनाने में मदद करते। झुग्गी बस्ती के लोग सुबह नाश्ते में इडली खाने के लिए पैसा खर्च नहीं करते थे। इसलिए मां-बेटे दूसरे मुहल्लों में जाकर इडली बेचते थे।

सरथ की मां सिर्फ पानी पीकर सो जाती थीं, ताकि उसके पांचों बच्चे भरपेट खाना खा सकें। मां ने बच्चों के लिए कई रातें सिर्फ पानी पीकर काटी। शुरू में तो सरथ को लगा था कि मां को पानी पीना पसंद है और इसीलिए वे ज्यादा पानी पीती हैं। लेकिन आगे चलकर उन्हें ये अहसास हुआ कि हमारी खातिर उन्होंने पानी पीकर काम चलाया। यही वजह है कि सरथ ने हमेशा मां से प्रेरणा ली और देखिए आज वो करोड़ों की कंपनी के मालिक हैं।