आसमां में सुराख़ करने के बाद ‘विजयी’ स्मृति ने अमेठी की नई सुबह के लिए लिया संकल्प

New Delhi: चुनाव रिजल्ट की जद्दोजहद के बाद आज के दिन की शुरुआत करते है पॉजिटिव न्यूज़ के साथ। स्मृति ईरानी अमेठीवासियों के लिए एक नया संकल्प ले रही है।
NOTHING IS IMPOSSIBLE .. ये साबित कर दिखाया है भाजपा की स्मृति ईरानी ने। ‘विजयी’ स्मृति ईरानी ने अभी-अभी ट्वीट कर कहा है कि ‘मेरी और अमेठी की एक नई सुबह हुई है। एक नया संकल्प अमेठी के विकास के लिए है।’ उन्होंने अमेठी की जनता का उन पर विश्वास करने के लिए आभार जताया ।

जनता बहुत स्मार्ट होती है, जनता सब जानती है..और स्मृति ईरानी ने अमेठी को जीतने के लिए जो मेहनत की थी वो किसी से छुपी नहीं थी। लोकसभा चुनाव के परिणाम भी इसी बात का सबूत है। ईरानी ने आसमान में सुराख़ करते हुए राहुल को जमीन पर ला दिया। राहुल गाँधी को करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को 55120 वोटों से मात दी । आपको बता दें की ये छोटे परदे की वही शांत सी बहुरानी है जो 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल के हाथों से पराजित हुई थी। वक्त ने करवट ली और ईरानी ने अपने आपको राजनीति में भी साबित किया। छोटे परदे पर स्मृति जहाँ ‘क्योंकि सांस भी कभी बहु थी’ धारावाहिक में अपने परिवार को साथ लेकर चलती थी। वहीं राजनीति में ईरानी अमेठी के अपने परिवार को साथ लेकर विकास की यात्रा में चलने को तैयार है । इसकी ख़ुशी और जज़्बा उनके ट्वीट में भी देखने को मिलता है ।

अमेठी लोकसभा सीट पर एक नज़र

कांग्रेस का दुर्ग कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट चर्चित सीटों में से एक है। अमेठी लोकसभा सीट का यह रिकॉर्ड रहा है कि आज तक गांधी परिवार का कोई भी नेता इस सीट से हारा नहीं था लेकिन स्मृति ईरानी ने ये रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है। राहुल गांधी अमेठी से लगातार तीन बार सांसद रहे लेकिन इस बार उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा। राहुल गांधी को टक्कर देते हुए बीजेपी से स्मृति ईरानी को 55120 मतों से जीत हासिल हुई है।

एक नज़र स्मृति ईरानी पर

ईरानी साल 2004 में बीजेपी महाराष्ट्र युवा शाखा की उपाध्यक्ष बनीं। साल 2004 में ही उन्होंने दिल्ली के चांदनी चौक से कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ा, इसमें उनकी हार हुई। फिर उन्हें बीजेपी की केंद्रीय समिति का एग्जीक्यूटिव मेंबर बनाया गया और 2010 में वह पार्टी की राष्ट्रीय सचिव और महिला विंग की अध्यक्ष बनी। स्मृति साल 2011 में राज्यसभा की सदस्य बनी। साल 2014 में उन्होंने अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा। जिससे वो चर्चा का विषय बनीं । इस दौरान उन्होंने राहुल को कड़ी टक्कर दी लेकिन वह एक लाख वोटों से हार गईं। राहुल के खिलाफ चुनाव हारने के बावजूद 2014 में उन्हें केंद्र में मानव संसाधन विकास मंत्रालय दिया गया। हालांकि बाद में उन्हें केंद्रीय कपड़ा मंत्री का जिम्मा सौंपा गया।

वो कहते है ना कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। उसी तरह अपने जीवन में कई बार हार और अप्स एन्ड डाउन देखने वाली स्मृति ने हार नहीं मानी। इसका नतीजा 2019 लोकसभा चुनाव के रिजल्ट ने दिया। स्मृति ने ये लोकसभा चुनाव एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लड़ा और वो इस चुनाव में कामयाब हुई।
लाइव इण्डिया भी आपसे यही कहना चाहता है कि अपने मन में विश्वास भरिये और सपनों के मैदान में उन्हें पूरा करने के लिए कूद जाइये। मन में अगर विश्वास हो तो कामयाबी जरूर मिलती है।