देश के लिए श’हीद हो गया भाई…आज जाकर उसकी मूर्ति को राखी बांधती है बहन

New Delhi : वो आज जिंदा नहीं है, लेकिन वो नहीं है… यह भी मन मानने को मंजूर नहीं है। दुनिया के लिए तो वो मर गए होगें लेकिन हमारे लिए आज भी जिंदा है। जिंदा है दिलों में…जिंदा है भावनाओं में, जिंदा है एक नई राह दिखाने के लिए…एक नई राह दिखाने के लिए व ख्वाब पूरे करने के लिए।

यही कारण है कि रक्षाबंधन पर श’हीद भाइयों की प्रतिभाओं पर भाईयों का अक्श देखती है बहने। मांगती है उनकी लंबी उम्र की दुआ व लेती है सुरक्षा का वादा भी। हम बात कर रहे है देश के लिए रक्षा करते हुए श’हीद भाईयों की। रक्षाबंधन के त्योहार में बहनें इनकी प्रतिमाओं पर तिलक लगाती है,राखी बांधती है व मिठाई देकर उनकी झोली भरती है। साथ ही उनके बदले बहनें भी भाइयों से मांगती है जिंदगी भर सुरक्षा का वादा। कुछ ऐसा ही भावुक नजारा देखने को मिलता है सीकर झुझुनूं बार्डर पर फतेहपुर तहसील में स्थित गांव दीनवा लाडखानी में।

रक्षाबंधन पर श’हीद धर्मवीर सिंह शेखावत की बहन उषा कंवर हर वर्ष गुजरात से भाई की प्रतिमा को राखी बांधने के लिए आती है और हर वर्ष भाई की प्रतिमा को राखी बांधती है। पुराने यादों को बताते हुए उषा कंवर कहती है कि जब भाई धर्मवीर सेना में था तो वो कहता था कि मेरे दोस्तों में सबसे पहले मेरी राखी आनी चाहिए और उसके लिए मैं एक महीने पहले से तैयारियां करती थी। उनके भाई रक्षा के लिए पूरे साल हाथ पर राखी बांधकर रखते थे। हर सपना उन्होंने पूरा किया। उषा कहती है कि भाई धर्मवीर सिंह का ख्वाब था कि अपने हाथों से शादी कर बहन को विदा करें लेकिन वो पहले ही श’हीद हो गए।

आपको बता दे की धर्मवीर सिंह कश्मीर के लालचैक में तैनात थे 2005 में आं’तकी हम’ले में वो श’हीद हो गए। यह कहानी अकेले दीनवा गांव की नहीं है ब्लकि पूरे शेखावाटी की है। रक्षाबंधन पर श’हीद भाईयों की बहन उनकी प्रतिमाओं पर राखी बांधती है उन सब बहनों के लिए आज उनका भाई जिंदा है उन्हे राखी बांधते बांधते वो भावुक हो जाती है। ऐसे ही हजारों बहने अपने अपने फौजी भाईयों को सीमा पर राखी भेजती है ताकि वो देश की सुरक्षा कर सके। दीनवा लाड़खानी को वैसे श’हीदों का गांव कहा जाता है। इस गांव से 13 फौजी देश की रक्षा करते करते श’हीद हो गए। गांव के गवाड़ में तीन श’हीदों की प्रतिमाएं लगी हुए है उन्हें देखकर आज भी हजारों युवा सेना में जाने का सपना संजोयें रखते हैं।