दिल्ली की महिलाओं ने दशहरा पर मनाया ‘सिंदूर खेला’ का त्योहार, जानें इसका महत्व

New Delhi: दिल्ली के मिनी कोलकाता कहे जाने वाले क्षेत्र चित्तरंजन पार्क में महिलाओं ने दशहरा पर पूरे उत्सव के साथ सिंदूर खेला में भाग लिया। माना जाता है कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा अपने मायके आती हैं जिन्हें दसवे दिन विदाई के तौर पर इस परंपरा को निभाया जाता है। इस दिन महिलाएं मां दुर्गा के माथे और चरणों में सिंदूर लगाती हैं, जिसके बाद उस सिंदूर को वो एक-दूसरे के लगाकर सुहागिन बने रहने की प्रार्थना करती हैं।

विजय दशमी के दिन, दुर्गा पूजा के अंतिम दिन, विवाहित बंगाली हिंदू महिलाएं देवी के माथे और पैरों पर सिंदूर लगाती हैं और एक दूसरे के चेहरे पर सिंदूर लगाकर उन्हें मिठाई खिलाती हैं।

सिंदूर खेला बंगाली परंपरा का बेहद ही खास पर्व है। इस परंपरा की शुरूआत 450 साल पहले पश्चिम बंगाल और बाग्लादेश के कुछ हिस्सों से शुरू हुई थी। इस खास दिन विवाहित महिलाएं मां दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी की पूजा के बाद उनका उनका श्रंगार करती हैं और सिंदूर भी लगाती है। इसके साथ ही महिलाएं एक-दूसरे को भी सिंदूर लगाती हैं। इस त्योहार की मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होकर सभी महिलाओं को वरदान देते हैं।

एक भक्त, निर्मला ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “सिंदूर लगाना सभी विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर हम ‘सिंदूर की खीर’ मनाते हैं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर हम एक-दूसरे के चेहरे पर ‘सिंदूर’ लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि आप यदि आपके चेहरे पर सिंदूर की मात्रा अधिक है, तो एक लंबी शादीशुदा जिंदगी होगी। ” अनुराधा सहगल ने कहा, “आज पूजा का आखिरी दिन है और हम देवी सिंदूर की खीर से विदाई देने जा रही हैं। मैं पंजाबी हूं और वास्तव में उत्साहित हूं।”

सीआर पार्क के पूजो समारोह को राष्ट्रीय राजधानी में सर्वश्रेष्ठ दुर्गा पूजाओं में से एक माना जाता है और यह हर साल एक प्रमुख आकर्षण होता है। इस क्षेत्र को मिनी कोलकाता के नाम से जाना जाता है।