श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिन्होंने धारा 370 के विरोध में नेहरु मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था

New Delhi: “एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे।” जम्मू-कश्मीर के बारे में ऐसा कहने वाले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज जन्म जयंती है। मुखर्जी का जन्म छह जुलाई 1901 को कलकत्ता के एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। मुखर्जी ने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की। उसके पहले अध्यक्ष भी वही थे। जनसंघ ही बाद में जाकर भारतीय जनता पार्टी बना। मुखर्जी अनुच्छेद 370 के कट्टर विरोधियों में से एक थे। वे नहीं चाहते थे कि कश्मीर का कोई अलग कानून हो।

वे कहते थे कि भारत के अन्य राज्यों की तरह ही कश्मीर भी भारत का हिस्सा रहे। इसी का विरोध करने के लिए वह कश्मीर चले गए। उन दिनों कश्मीर जाने के लिए भारत के और हिस्सों के निवासियों को जम्मू जाने के लिए एक तरह के परमिट लेना पड़ता था। 11 मई, 1953 में शेख़ अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने हिरासत में ले लिया। जहाँ उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया गया। इसके ठीक बाद ही 23 जून 1953 को मुखर्जी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। कहा जाता है कि उनकी मौत रहस्यमयी तरीके से हुई। जिसपर अब तक भाजपा के नेता सवाल खड़े करते हैं। मुखर्जी के पुण्यतिथि को भाजपा “बलिदान दिवस” के रूप में मनाती है। जिस राष्ट्रवाद की राजनीतिक फसल को भाजपा काटती है उसके बीज मुखर्जी ने बोए थे। वे नेहरू सरकार में कुछ समय के लिए मंत्री भी रहे लेकिन अनुच्छेद 370 के कारण उनके और नेहरु के बीच मतभेद हुए और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। मुखर्जी का राष्ट्रवाद उथले पानी में नहीं तैरता था वह एक महान शिक्षाविद थे। कलकत्ता विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद 1926 में सीनेट के सदस्य बने। साल 1927 में उन्होंने बैरिस्टरी की परीक्षा पास की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुखर्जी को याद करते हुए लिखा है – “महान शिक्षाविद् और प्रखर राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा”।

पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने लिखा है – “आज डॉ.श्यामा प्रसाद मुख़र्जी की जन्म जयंती है. राष्ट्रवादी विचारधारा से ओत-प्रोत राजनैतिक दल भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ.मुख़र्जी की स्मृति को श्रद्धापूर्वक नमन”।

भाजपा के ऑफिसियल twitter हैंडल से लिखा गया है – “भारत की एकता एवं अखंडता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, महान शिक्षाविद, जनसंघ के संस्थापक व हमारे पथ प्रदर्शक परम श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर शत्-शत् नमन”।