जीवन-यापन करने के लिए परचूनी की दुकान चलाने वाले भागीरथी चौधरी अजमेर से पहुंचे संसद

New Delhi

अजमेर लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित सांसद भागीरथ ने उन बातों को झूठला दिया, जो यह दावा करती हैं कि भारतीय राजनीति में सिर्फ पैसे और बड़े लोगों का दबदबा है।

भागीरथ चौधरी कोई बड़े राजनीतिज्ञ या तेज तर्रार नेता नहीं हैं और न किसी बड़े घराने से ताल्लुक रखते हैं। चौधरी किसान परिवार से आते हैं। चौधरी पुष्कर विधानसभा क्षेत्र स्थित मानपुरा की ढाणी निवासी हैं। चौधरी 1984 में किशनगढ़ आ गए थे। यहां परचूनी की दुकान खोली। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

भाजपा प्रत्याशी भागीरथी चौधरी

विधानसभा का सफर

चौधरी को पार्टी के लिए की गई मेहनत का फल 2003 के विधानसभा चुनावों के समय मिला। भाजपा ने उन्हें विधानसभा का टिकट दिया और वह जीतकर विधानसभा पहुंचे।

चौधरी पर भाजपा ने 2008 में फिर से भरोसा जताया और विधानसभा का टिकट दिया। इस बार वह कांग्रेस के नाथूराम सिनोदिया से पराजित हो गए। 2013 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने भरोसा जताते हुए फिर से टिकट दिया और कांग्रेस के प्रत्याशी सिनोदिया को 31084 मतों से शिकस्त दी।

निष्ठा का मिला तोहफा

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने चौधरी का टिकट काट दिया। चौधरी ने पार्टी प्रत्याशी विकास का पूर्ण समर्थन किया। जिसका लाभ उनको उन्हें अजमेर लोकसभा सीट के रूप में मिला।

किसान पृष्ठभूमि के नेता

चौधरी किसान परिवार से आते हैं, उनके पिता रामचंद चौधरी और माता दाखा है। पिता खेती का कार्य करके ही परिवार का भरण-पोषण करते थे। चौधरी का जन्म 1जून 1954 को हुआ था। चौधरी की पहली पत्नी का निधन भंवरी देवी का निधन हो गया था, उसके बाद उन्होंने अंजना के साथ सात फेरे लिए। चौधरी ने बी.ए द्वितीय वर्ष तक पढ़ाई की है।

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कबड्डी और वॉलीबाल पसंदीदी खेल

भाजपा के नवनिर्वाचित प्रत्याशी चौधरी को कबड्डी और वॉलीबाल खेल में रूचि है। वह खेलों के उद्घाटन समारोह और खेलों के महत्व पर हमेशा बल देते हैं।