शिवसेना ने तानाशाह हिटलर से की बीेजेपी की तुलना, कहा- महाराष्ट्र दिल्ली का गुलाम नहीं था

New Delhi: महाराष्ट्र सरकार के गठन पर गतिरो’ध जारी है। शिवसेना ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी की तुलना कु’ख्यात जर्मन ता’नाशाह शासक एडोल्फ हिटलर से की और दावा किया कि “महाराष्ट्र दिल्ली का गुलाम नहीं था”।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक बार फिर दोहराया कि महाराष्ट्र बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं चाहता और पार्टी कार्यवाहक सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ बातचीत के लिए तैयार नहीं है।

शिवसेना ने दावा किया कि राज्य विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पीएम मोदी ने देवेंद्र फड़णवीस को सीएम बनने का आशीर्वाद दिया। शिवसेना के संपादकीय में कहा गया है, “15 दिनों के बाद भी, उन्होंने [फडणवीस] शपथ नहीं ली है क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह राज्य के मामलों में शामिल नहीं थे।”

महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक सरकार का आह्वान करते हुए, शिवसेना ने देवेंद्र फड़णवीस को सीएम के रूप में समर्थन देने की संभावना से इनकार किया।

शिवसेना ने कहा, “भाजपा को डराने की रणनीति के बावजूद स्पष्ट जनादेश नहीं मिला और एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए।”

शिवसेना के संपादक संजय राउत द्वारा लिखित सामना संपादकीय में कहा गया है कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे यह तय करेंगे कि इस बार मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा, जिसमें एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

इस बीच आदित्य ठाकरे से शनिवार देर रात मुंबई के मलाड के द रिट्रीट होटल में पार्टी विधायकों से मुलाकात की।

बता दें कि शनिवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। इस पर एनसीपी नेता नवाब मलिक ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र में अगर बीजेपी की सरकार गिर जाती है तो राज्य को हित के लिए हम लोग वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश करेंगे। उनकी पार्टी शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करने पर विचार कर सकती है।

उन्होंने आगे कहा, ‘राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पहले भी शुरू किया जा सकता था। उनको सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि बीजेपी के पास स्थिर सरकार बनाने के लिए संख्या नहीं है।’

मलिक के मुताबिक 54 विधायकों वाली एनसीपी ने राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करने के लिए 12 नवंबर को अपने विधायकों की बैठक बुलाई है।

हालांकि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने शिवसेना के साथ जाने से मना किया है। पवार ने 24 अक्टूबर को कहा था, ‘मैं साफ करना चाहूंगा कि मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना को समर्थन देने और उनके साथ जाने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है। महाराष्ट्र में हमारे अपने साथी हैं और हम उनके साथ चलेंगे और उनका ही समर्थन करेंगे। हम हमारे फैसलों पर टिके रहें। राकांपा, कांग्रेस और दूसरे सहयोगी भविष्य की कार्रवाई के बारे में एक साथ फैसला करेंगे। हम शिवसेना के साथ नहीं जायेंगे।’

बता दें कि 21 अक्टूबर को 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के लिए हुए चुनावों में बीजेपी ने 105 सीटों, शिवसेना ने 56, राकांपा ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

अगर शिवसेना ने सदन में बीजेपी के खिलाफ वोट दिया तो समर्थन देने पर करेंगे विचार: NCP नेता मलिक

भारत को किसी नए मंदिर, चर्च, मस्जिद, गुरुद्वारे की जरूरत नहीं है: कार्ति चिदंबरम