शरद मिले उद्धव से, कहा- कंगना के साथ गलत हुआ, निरुपम बोले- कहीं शिवसेना न डिमोलिश हो जाये

New Delhi : सुशांत प्रकरण में मुखर कंगना रनौत का पेंग्विन कमेंट और फिर बॉलीवुड के मूवी माफिया, नेपो किड‍्स को लेकर आक्रामक रुख आज 9 सितंबर को अपने आखिरी मुकाम पर पहुंचा। शिवसेना सरकार ने बीएमसी को जरिया बनाते हुये कंगना के ऑफिस को नेस्तनाबूद कर दिया। जिसके बाद पूरे देश में कंगना रनौत के समर्थन में माहौल बनने लगा। खासकर तब जब शिवसेना सरकार से बिना डरे वे मुम्बई पहुंची और अपने ऑफिस के भीतर की गई तोड़फोड़ का वीडियो जारी करते हुये उद्धव ठाकरे को सीधी चुनौती दे डाली। उनको बॉलीवुड के बड़े स्टार्स का समर्थन तो नहीं मिला लेकिन पॉलिटकल पार्टीज में हर तरफ उनकी ओर से ही बात की गई। शिवसेना अकेले घिर गई है इस पूरे मामले में।

यहां तक की कांग्रेस और एनसीपी के नेता भी कंगना के पक्ष में बोलना शुरू कर दिया। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने तत्काल मसले से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा- पूरे मुम्बई में इस तरह के मामले हैं। इस मामले में बीएमसी को ऐसा नहीं करना चाहिये था। यह बहुत गलत किया गया है। देर शाम शरद पवार ने उद्धव ठाकरे से भी मुलाकात की और उन्होंने सरकार चलाने में इस विवाद को ज्यादा हवा न देने की नसीहत भी दी। कई बातें हैं लेकिन एक बात जो सटीक लग रही है वो ये कि एनसीपी कहीं इसी मसले को लेकर शिवसेना से किनारा न कर ले और भाजपा अपनी चाल में कामयाब हो जाये। हालांकि इस संभावना को आकार लेने में काफी समय लगेगा।
कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा- कंगना का ऑफिस अवैध था या उसे डिमॉलिश करने का तरीका ? क्योंकि हाई कोर्ट ने कार्रवाई को गलत माना और तत्काल रोक लगा दी। पूरा एक्शन प्रतिशोध से ओत-प्रोत था। लेकिन बदले की राजनीति की उम्र बहुत छोटी होती है। कहीं एक ऑफिस के चक्कर में शिवसेना का डिमॉलिशन न शुरु हो जाए !

शाम में हर न्यूज चैनल पर कांग्रेस नेताओं ने इसे गलत करार दिया और शिवसेना अकेले पड़ गई। ऐसा लग रहा है कि शिवसेना इस मामले में भाजपा की राजनीतिक चाल में फंस गई है। यही नहीं शिवसेना को अब अपने अस्तित्व को बचाना भी एक बड़ी चुनौती हैं, क्योंकि शिवसेना के विरोध में जय श्रीराम के नारे लग रहे हैं और पार्टी को जबरिया सेक्युलर की पंक्ति में खड़ा कर दिया गया है जहां कोई उसे स्वीकार करने को तैयार नहीं। हालांकि ट्रेंड से ये तो जरूर समझ में आ रहा है कि पहली बार शिवसेना की कोई कार्रवाई पूरे देश के मुसलमानों को बहुत पसंद आ रही है।

भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने कहा कि शिवसेना सरकार को बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। वे एक महिला को झुकाने के लिये नीच हरकत पर उतर आई है। पहले ही सुशांत प्रकरण में ये साबित हो गया है कि उनकी पूरी मिलीभगत है। वैसे तो कंगना प्रकरण में कांग्रेस, एनसीपी अपना पल्ला झाड़ रही है लेकिन ऐसा तुरंत संभव हो पायेगा ऐसा लगता नहीं है।

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